Donald Trump ने की मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट की तारीफ, सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान के इस कदम को बताया बड़ा फैसला।

Nura Basta16 August 20262 min read79 viewsSaudi
Donald Trump ने की मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट की तारीफ, सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान के इस कदम को बताया बड़ा फैसला।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान की सरकारों के इस कदम की सराहना की है। इन तीनों देशों ने मिलकर 7 अगस्त 2026 को मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर अपने हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद से पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा हो रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने इस समझौते को एक बड़ा और साहसी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला क्षेत्रीय स्तर पर आपसी तालमेल को बेहतर बनाने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण शुरुआत है। इस समझौते के बाद अब इन देशों में अपनी सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने की क्षमता में भी इजाफा देखने को मिल रहा है।

सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक समझौता

इस नई रणनीतिक व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू करने का काम सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman, तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मिलकर किया है। इस समझौते के तहत तीनों देश रक्षा-औद्योगिक उत्पादन, सैन्य प्रशिक्षण और आपसी सैन्य अभ्यास के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इस डिफेंस पैक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके नियमों के मुताबिक यदि किसी एक देश पर भी कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तुर्की के अधिकारियों ने इस नियम की तुलना नाटो के आर्टिकल 5 की सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांतों से की है।

समझौते का दायरा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक इस समझौते को एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह सौदा असल में सऊदी अरब के वित्तीय संसाधनों, तुर्की की आधुनिक सैन्य तकनीक और पाकिस्तान की मानव शक्ति का एक बेहतरीन मेल है। हालांकि, इस समझौते में शामिल सभी सदस्य देशों ने यह साफ कर दिया है कि यह पैक्ट पूरी तरह से रक्षात्मक यानी डिफेंसिव है। सऊदी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस ट्रीटी में किसी भी प्रकार का कोई परमाणु आयाम शामिल नहीं है। मक्का में हुआ यह समझौता क्षेत्रीय नेतृत्व का एक बड़ा प्रतीक है, जिसका मुख्य उद्देश्य साल 2026 की ईरान वॉर के दौरान सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना है।

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