Donald Trump Plane Swap: ईरान के हमले के डर से तुर्की में ट्रंप ने गुप्त रूप से बदला अपना विमान, अमेरिकी खुफिया एजेंसी का बड़ा खुलासा।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक बहुत बड़ा खुलासा किया है जिसमें बताया गया है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की जान को खतरा था और इसी वजह से तुर्की में उनका विमान गुप्त रूप से बदला गया था। यह पूरी खुफिया कार्रवाई पिछले महीने 11 अगस्त 2026 को सामने आई जब एक प्रतिष्ठित रिपोर्ट में यह बात सार्वजनिक हुई कि ईरान की तरफ से उन्हें खत्म करने की साजिश रची जा रही थी। इस सीक्रेट ऑपरेशन को इस तरह से अंजाम दिया गया कि विमान में साथ चल रहे पत्रकारों को भी इसकी भनक तक नहीं लगी और कई व्हाइट हाउस के कर्मचारी भी यह मानते रहे कि ट्रंप अपने पुराने विमान में ही सफर कर रहे हैं।
तुर्की यात्रा के दौरान क्या हुआ था पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, जब Donald Trump नाटो शिखर सम्मेलन यानी NATO summit में हिस्सा लेने के बाद तुर्की से वापस लौट रहे थे, तभी अमेरिकी खुफिया विभागों को ईरान की तरफ से एक बहुत बड़ा और गंभीर इनपुट मिला। अधिकारियों का मानना था कि यह ईरान की तरफ से प्लान किया गया एक पुख्ता हमला था जिससे बचाने के लिए तुरंत कदम उठाना जरूरी हो गया था। अंकारा से उड़ान भरने से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक सार्वजनिक बयान जारी किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि वह ब्रिटेन के RAF Mildenhall बेस तक जाने के लिए अपने पुराने एयर फोर्स वन का इस्तेमाल करेंगे और कतर द्वारा दान में दिए गए नए Boeing 747-8 विमान की अभी जांच चल रही है।
कतर के विमान को लेकर थी सुरक्षा चिंताएं
जनता और मीडिया को भ्रमित करने के लिए यह एक सोची-समझी चाल थी ताकि असली योजना को गुप्त रखा जा सके। उस समय कतर की तरफ से मिले नए विमान की तेजी से हो रही मरम्मत और उसकी सुरक्षा को लेकर पहले से ही कई तरह के सवाल उठ रहे थे। इस बनावटी घोषणा के बाद ट्रंप ने योजना के मुताबिक अपने मुख्य विमान में बैठने के बजाय एक छोटे सैन्य परिवहन विमान यानी C-32A military transport aircraft में प्रवेश किया। इस सीक्रेट सफर के दौरान उनके साथ युद्ध सचिव Pete Hegseth भी मौजूद थे। बाद में ब्रिटेन के मिलिट्री बेस पर पहुंचने के बाद उन्होंने अपने तय किए गए मूल एयर फोर्स वन विमान में दोबारा वापसी की।
इस पूरी घटना के बाद जब Donald Trump वाशिंगटन जा रहे थे, तब उन्होंने उड़ान के दौरान खुद ही तेहरान की तरफ से मिल रही धमकियों का जिक्र किया था लेकिन उस वक्त उन्होंने इस गुप्त विमान बदलने की रणनीति के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया था। अंकारा से निकलते वक्त अपनाए गए इस सुरक्षा तंत्र और झांसे ने उनकी यात्रा को सुरक्षित बनाने में मदद की क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों को डर था कि ईरान इस दौरे का फायदा उठाकर कोई बड़ी कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी सरकार और खुफिया तंत्र ने इस संवेदनशील मामले में पूरी गोपनीयता बरती ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके और यात्रा को पूरी तरह से सुरक्षित पूरा किया जा सके।