अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। 25 मई 2026 को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत बहुत अच्छे से आगे बढ़ रही है। लेकिन उन्होंने एक बड़ी शर्त रखी है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता होना है, तो संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन और तुर्की को भी ‘इब्राहिम समझौते’ (Abraham Accords) में शामिल होना पड़ेगा।
ट्रंप की नई शर्त: इन देशों का समझौते में शामिल होना होगा अनिवार्य
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि सऊदी अरब और कतर को तुरंत इस समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि या तो यह समझौता बेहद शानदार और ऐतिहासिक होगा या फिर कोई समझौता नहीं होगा। अगर कोई सहमति नहीं बनती है, तो फिर से ‘जंग के मैदान’ (Battlefront) जैसे हालात बन सकते हैं। ट्रंप ने यह सुझाव भी दिया कि अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौता करता है, तो वह खुद भी इस इब्राहिम समझौते का हिस्सा बन सकता है।
अमेरिका और ईरान की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आई?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए ईरान के साथ बातचीत में काफी प्रगति हुई है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी जल्दबाजी में नहीं हैं और कोई खराब समझौता स्वीकार नहीं करेंगे। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस बातचीत पर थोड़ा संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने वादों को पूरा करेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। वहीं ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ बातचीत के सिलसिले में कतर पहुंच चुके हैं और बातचीत जारी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान डील को लेकर क्या शर्त रखी है?
डोनाल्ड ट्रंप ने शर्त रखी है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए UAE, सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन और तुर्की का इब्राहिम समझौते (Abraham Accords) में शामिल होना अनिवार्य होना चाहिए।
ईरान का इस बातचीत पर क्या रुख है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका की विश्वसनीयता पर संदेह जताया है, हालांकि उनके मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ बातचीत के सिलसिले में कतर पहुंच चुके हैं।