US President Donald Trump का बड़ा बयान, ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी हुई सख्त, शांति समझौते तक जारी रहेगी पाबंदी

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के पोर्ट्स पर यह नाकेबंदी बहुत मजबूत है और इसे पूरी सख्ती से लागू किया जा रहा है। यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए उठाया गया है ताकि वहां के साथ एक स्थायी शांति समझौता हो सके।

अमेरिका ने कब और कैसे लगाई ईरान के बंदरगाहों पर पाबंदी?

President Trump ने 12 अप्रैल 2026 को इस सैन्य नाकेबंदी का ऐलान किया था, जो 13 अप्रैल से पूरी तरह लागू हो गई। U.S. Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उनके सैनिक इस आदेश का सख्ती से पालन करवा रहे हैं। यह पाबंदी उन सभी जहाजों पर लागू है जो ईरान के बंदरगाहों की तरफ जा रहे हैं या वहां से आ रहे हैं, चाहे वे Arabian Gulf में हों या Gulf of Oman में। हालांकि, जो जहाज ईरान के लिए नहीं हैं, उन्हें Strait of Hormuz से गुजरने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

ईरान पर इस नाकेबंदी का क्या असर पड़ा है?

Donald Trump के अनुसार, इस नाकेबंदी की वजह से ईरान को हर दिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान हो रहा है। CENTCOM ने जानकारी दी कि अब तक 31 जहाजों को ईरान के पोर्ट्स की तरफ जाने से रोका गया है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने Indian Ocean में एक तेल टैंकर Majestic X को अपने कब्जे में लिया है। दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इसे युद्ध की कार्रवाई बताया है और इस पाबंदी की कड़ी निंदा की है।

क्या अब शांति वार्ता और युद्ध विराम की उम्मीद है?

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश की थी, लेकिन फिलहाल हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 22 अप्रैल को Trump ने युद्ध विराम (ceasefire) को आगे बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान के साथ लेनदेन 100% पूरा नहीं हो जाता। वहीं, ईरान ने इस पाबंदी को बातचीत के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बताया है और शांति वार्ता को अस्वीकार कर दिया है।