अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ईरान के साथ बातचीत के लिए तो तैयार हैं लेकिन फिलहाल किसी भी तरह का युद्धविराम यानी सीजफायर नहीं करेंगे। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी सेना ईरान के सैन्य ठिकानों पर प्रभावी हमले कर रही है और जब तक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।

🚨: Lebanon Israeli Strike Update: लेबनान में इजरायली हमलों से बढ़ी मरने वालों की संख्या, अब तक 1021 लोगों की मौत

ट्रंप ने सीजफायर के लिए क्यों मना किया?

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी रणनीति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं जो इस युद्ध की दिशा तय कर सकती हैं।

  • ट्रंप का कहना है कि जब आप दुश्मन को पूरी तरह से खत्म करने के करीब हों तब युद्धविराम करना सही नहीं होता।
  • उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक तेल केंद्र खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर भारी बमबारी की है।
  • अमेरिकी सरकार का मानना है कि ईरान का शासन अब कमजोर पड़ चुका है और उनकी सैन्य क्षमताएं लगभग नष्ट हो गई हैं।
  • ट्रंप ने ईरान के नए नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सरेंडर कर देना चाहिए क्योंकि उनकी शर्तें अभी अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों प्रवासियों और स्थानीय देशों पर पड़ सकता है।

  • इराक ने युद्ध के कारण अपने दक्षिणी बंदरगाहों से तेल निर्यात में कमी आने की सूचना दी है।
  • ईरान ने कथित तौर पर इजरायल और पड़ोसी खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर जवाबी हमले की कोशिश की है।
  • प्रवासियों के लिए सुरक्षा अलर्ट: अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है क्योंकि वहां इंटरनेट और परिवहन पर भारी पाबंदियां हैं।
  • क्षेत्र संभावित प्रभाव और अपडेट
    Strait of Hormuz ट्रंप ने अन्य देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेने को कहा है।
    यूनाइटेड किंगडम (UK) ब्रिटेन ने अमेरिका को रक्षात्मक अभियानों के लिए अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति दी है।