US News: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुआवजे की मांग को ठुकराया, उल्टा ईरान से ही मांग डाला बड़ा हर्जाना

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की तरफ से रखे गए वित्तीय मुआवजे के प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। 10 अगस्त 2026 को जारी अपने एक बयान में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि तेहरान को खुद अपने एक्शन की वजह से हुए जान-माल के नुकसान की जिम्मेदारी लेनी होगी। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के खिलाफ एक तगड़ा जवाबी दावा ठोक दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर से तनाव बढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
ईरान ने रखी थीं कई बड़ी शर्तें
इससे पहले 8 अगस्त 2026 को ईरान ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए पूरे मुआवजे की मांग सामने रखी थी। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख Mohammad Bagher Zolghadr और विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने तेहरान की तरफ से कई कड़ी शर्तें रखी थीं। इनमें अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के बदले युद्ध के हर नुकसान की भरपाई, अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा सैन्य कार्रवाई रोकने, नेवल नाकेबंदी और प्रतिबंध हटाने, अमेरिकी फौजों को वापस बुलाने और ईरान की जमी हुई संपत्ति को रिहा करने जैसी मांगें शामिल थीं।
इस पूरे मामले की पूरी जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में देख सकते हैं। ईरान के इन तमाम तेवर के बाद अमेरिकी पक्ष की तरफ से यह कड़ा रुख सामने आया है।
ट्रंप ने मांगा पुराना हिसाब
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को साफ निर्देश दे दिए हैं कि वे तेहरान के साथ भविष्य की किसी भी बातचीत में इन अमेरिकी मांगों को मजबूती से शामिल करें। ट्रंप ने ईरान से उन सभी लोगों के परिवारों के लिए मुआवजा मांगा है जो पिछले 50 सालों में ईरानी समर्थित गतिविधियों की वजह से मारे गए या घायल हुए। इनमें सड़क किनारे बम धमाकों के पीड़ित, साल 2000 में हुआ USS Cole बम धमाका, अन्य युद्ध के दौरान हुए हताहत और प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले भी शामिल हैं।
पुराने फैसलों और समझौतों का जिक्र
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच अदालती फैसलों का इतिहास भी रहा है। पिछले साल 30 मार्च 2023 को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी ICJ ने एक फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया था कि अमेरिका को साल 1955 की फ्रेंडशिप ट्रीटी के उल्लंघन के लिए ईरान को कुछ जब्त संपत्तियों पर आंशिक मुआवजा देना चाहिए, हालांकि इसकी सही रकम तय होना अभी बाकी है। अमेरिका ने साल 2018 में इस ट्रीटी ऑफ एमिटी से अपने कदम पीछे खींच लिए थे। इसके अलावा साल 2016 में सैन्य उपकरणों की खरीद से जुड़ा 400 मिलियन डॉलर का मामला भी सुलझाया गया था, जिसमें ईरान को उसकी बाकी रकम के साथ करीब 1.3 बिलियन डॉलर का ब्याज भी मिला था। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच अंदरखाने सेमी-नेगोशिएशन यानी आंशिक बातचीत का दौर चल रहा है।