अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की नई शांति पेशकश को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अपनी शर्तें भेजी थीं, जिन्हें ट्रंप ने ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ बताया है। इस वजह से दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है और युद्ध की आशंकाएं गहरा गई हैं।

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ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखी थीं?

ईरान ने पाकिस्तान के मध्यस्थता के जरिए अपनी मांगें वॉशिंगटन भेजी थीं। ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार थीं:

  • लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में चल रहे युद्ध को तुरंत खत्म करना।
  • अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाना और विदेशों में जमा ईरानी पैसा वापस करना।
  • Strait of Hormuz पर ईरान का पूरा कंट्रोल बना रहना।
  • बिना किसी रोक-टोक के ईरानी तेल का निर्यात करना।
  • परमाणु भंडार (enriched uranium) के एक हिस्से को किसी तीसरे देश में भेजना, बशर्ते अमेरिका समझौते से पीछे न हटे।
  • परमाणु सुविधाओं को बिना हटाए कुछ समय के लिए यूरेनियम संवर्धन रोकना।

अमेरिका और इसराइल का इस पर क्या रिएक्शन है?

Donald Trump ने साफ शब्दों में कहा कि वह ईरान के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं और ईरान ने अब तक इतनी बड़ी कीमत नहीं चुकाई है जो उन्हें मंजूर हो। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला है। White House की डिप्टी प्रेस सचिव Anna Kelly ने कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।

दूसरी तरफ, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक ईरान के पास परमाणु भंडार रहेगा, यह युद्ध खत्म नहीं होगा। वहीं, UAE ने भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की बात कही है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने अपना प्रस्ताव अमेरिका तक कैसे पहुँचाया?

ईरान ने अपना जवाब और शर्तें पाकिस्तान के मध्यस्थों (mediators) के जरिए अमेरिका को भेजी थीं।

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को क्यों खारिज किया?

ट्रंप का मानना है कि ईरान की शर्तें उनके लिए स्वीकार्य नहीं हैं और ईरान ने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।