अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस सरकार के एक हालिया फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। ट्रंप ने फ्रांस की आलोचना तब की जब उसने इजरायल के लिए सैन्य सामान ले जा रहे अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने से रोक दिया। यह मामला 31 मार्च 2026 का है जब ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि फ्रांस ने इस मामले में कोई मदद नहीं की और अमेरिका इस व्यवहार को याद रखेगा।

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फ्रांस ने विमानों को रास्ता देने से क्यों मना किया

फ्रांस के सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे केवल गैर-लड़ाकू कार्यों के लिए अमेरिकी विमानों को अपने साझा ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ये संसाधन किसी भी तरह से ईरान के खिलाफ किए जाने वाले अमेरिकी अभियानों में शामिल नहीं होने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानूनों और 1944 के शिकागो कन्वेंशन के मुताबिक, हर देश के पास अपने हवाई क्षेत्र पर पूर्ण और अनन्य संप्रभुता होती है। इस नियम के तहत कोई भी देश सैन्य आवश्यकता या सार्वजनिक सुरक्षा के आधार पर विमानों के उड़ने पर प्रतिबंध लगा सकता है।

अन्य देशों ने भी अमेरिका पर लगाई पाबंदियां

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के बीच केवल फ्रांस ही नहीं, बल्कि यूरोप के कई अन्य देशों ने भी अमेरिकी उड़ानों पर रोक लगाई है। इन देशों की सूची और उनके फैसलों का विवरण नीचे दिया गया है:

  • Italy: इटली ने हथियार ले जा रहे अमेरिकी विमानों को अपने सिसिली एयरबेस का उपयोग करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
  • Spain: स्पेन ने अपने हवाई क्षेत्र को अमेरिकी विमानों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। स्पेन के रक्षा मंत्री ने इस संघर्ष को गैर-कानूनी बताया है।
  • Switzerland: स्विट्जरलैंड ने अपनी तटस्थता के नियमों का हवाला देते हुए अमेरिका के दो ओवरफ्लाइट अनुरोधों को खारिज कर दिया।

इस पूरे मामले पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट का कहना है कि अमेरिका का सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ योजना के अनुसार सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। वहीं भारत के पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार ने ट्रंप के दावों पर सवाल उठाते हुए इसे आगामी मध्यावधि चुनावों से जुड़ी हताशा बताया है।

Aanya

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