अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले के दोषियों का पता शायद कभी नहीं चल पाएगा। उन्होंने यह बात NATO के चीफ Mark Rutte के साथ मुलाकात के दौरान पत्रकारों को बताई। ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि इस हमले के पीछे अमेरिकी मिसाइल का हाथ था।

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यह हमला 28 फरवरी 2026 को ईरान के Minab इलाके के Shajareh Tayyebeh Elementary School पर हुआ था। इस मिसाइल हमले में 156 आम लोग मारे गए थे जिनमें 120 बच्चे थे। ईरान सरकार का दावा है कि इस हादसे में 175 से ज्यादा लोगों की जान गई।

ट्रंप के बयानों में समय के साथ बदलाव देखा गया है। शुरुआत में उन्होंने बिना किसी सबूत के ईरान को ही इस हमले का जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद उन्होंने कहा कि युद्ध में गलतियां होती हैं और यह एक दुखद घटना है। अब वे कह रहे हैं कि दोषियों की पहचान करना मुश्किल है।

दूसरी तरफ Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना की अपनी शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि इस हमले के लिए अमेरिकी सेना ही जिम्मेदार हो सकती है। बताया गया कि यह एक बड़ी तकनीकी गलती थी क्योंकि पुराने डेटा और नक्शों की वजह से स्कूल की इमारत को गलती से पास के मिलिट्री बेस का हिस्सा समझ लिया गया।

मौके से मिले सबूतों ने भी अमेरिकी संलिप्तता की ओर इशारा किया। वहां से Tomahawk क्रूज मिसाइल के टुकड़े मिले हैं जो सिर्फ अमेरिका के पास होते हैं। इन टुकड़ों पर अमेरिकी हथियारों की कंपनियों के नाम और पेंटागन के कॉन्ट्रैक्ट नंबर भी लिखे पाए गए। विशेषज्ञों ने कन्फर्म किया कि ईरान के पास ऐसी मिसाइलें नहीं हैं।

इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी नाराजगी है। UN और UNESCO ने इसे मानवीय कानूनों का बड़ा उल्लंघन बताया है। Amnesty International और Human Rights Watch ने इसे युद्ध अपराध करार देते हुए जवाबदेही की मांग की है। अमेरिका के 46 सीनेटरों ने भी रक्षा सचिव Pete Hegseth को पत्र लिखकर इस हमले और उसमें हुई मौतों पर जवाब मांगा है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.