अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान और वेनेजुएला को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका ईरान में बिल्कुल वैसी ही कार्रवाई कर रहा है जैसी उसने वेनेजुएला में की थी। इस बीच, सऊदी अरब ने ट्रम्प के कूटनीति को मौका देने के फैसले का स्वागत किया है। खाड़ी देशों के अनुरोध पर अमेरिका ने ईरान पर होने वाले सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया है और बातचीत का रास्ता चुना है।

क्या है अमेरिका का ‘वेनेजुएला मॉडल’ जो ईरान पर लागू हो रहा है?

डोनाल्ड ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका ईरान में ‘वेनेजुएला मॉडल’ अपना रहा है। वेनेजुएला में जनवरी 2026 में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व में बड़ा बदलाव आया था। वहां से ईरानी कर्मियों को हटाना और प्रतिबंधों में ढील देना अमेरिका की प्राथमिकता बन गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल के तहत सीधे शासन बदलने के बजाय आर्थिक और सैन्य दबाव बनाकर सरकार के प्रमुख को बदलने की कोशिश की जाती है। ट्रम्प को भरोसा है कि यह तरीका ईरान में भी काम करेगा।

सऊदी अरब और खाड़ी देशों ने क्यों की ट्रम्प के फैसले की तारीफ?

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने डोनाल्ड ट्रम्प के उस फैसले की सराहना की है जिसमें उन्होंने कूटनीति को एक मौका देने की बात कही है। दरअसल, अमेरिका ने 19 मई 2026 को ईरान पर एक सैन्य हमला करने की योजना बनाई थी। लेकिन खाड़ी देशों के अनुरोध पर ट्रम्प ने इस हमले को रोक दिया क्योंकि इस समय गंभीर राजनयिक बातचीत चल रही है। सऊदी अरब चाहता है कि बातचीत के जरिए इस युद्ध और तनाव को समाप्त किया जाए।

अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन को लेकर उठे सवाल

डोनाल्ड ट्रम्प की इस विदेश नीति पर दुनिया भर में चर्चा हो रही है। कई विश्लेषकों और विशेषज्ञों ने 21 मई 2026 को इस सैन्य नीति पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी भी स्वतंत्र देश के खिलाफ बिना अंतरराष्ट्रीय समर्थन या बिना किसी ठोस कारण के सैन्य बल का उपयोग करना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर क्या दावा किया है?

डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान में वही अभियान चला रहा है जो उसने वेनेजुएला में चलाया था। उनका कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान की परमाणु क्षमता और सेना को भारी नुकसान पहुंचा है।

सऊदी अरब ने इस पूरे मामले पर क्या कहा है?

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ट्रम्प द्वारा सैन्य हमले को रोककर बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने के फैसले की सराहना की है।