अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव पर एक बड़ा बयान जारी किया है। 2 अप्रैल 2026 को दिए गए अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि वे ईरानी खतरों को पूरी तरह से रोकने के लिए काम कर रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी कार्रवाई से ईरानी नौसेना और वायु सेना को काफी नुकसान पहुंचा है और उनके ज्यादातर नेता मारे गए हैं। ट्रंप के अनुसार अब ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमला करने की ताकत काफी हद तक कम हो गई है।

युद्धविराम के दावों पर क्या है असली स्थिति?

ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के नए राष्ट्रपति ने सीजफायर यानी युद्ध रोकने की अपील की है और वे इस पर तभी विचार करेंगे जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए पूरी तरह खुला और सुरक्षित रखा जाए। हालांकि, ईरान ने इन बातों को सिरे से नकार दिया है और इन्हें गलत बताया है।

  • ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के सीजफायर वाले दावे को झूठ और बेबुनियाद करार दिया है।
  • ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा है कि उनका देश किसी भी डेडलाइन को नहीं मानता और लंबे समय तक संघर्ष के लिए तैयार है।
  • ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं करेगा।
  • पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।

नाटो और सैन्य कार्रवाई से जुड़े अहम अपडेट

इस बीच ट्रंप ने एक बार फिर नाटो (NATO) गठबंधन से अमेरिका को बाहर निकालने की चेतावनी दी है और इसे एक कमजोर संगठन बताया है। वहीं दूसरी तरफ, यूरोप के कुछ देशों जैसे फ्रांस और इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से मना कर दिया है। अमेरिका की सैन्य कमान ने भी स्थिति साफ की है।

संबंधित पक्ष हालिया गतिविधि
CENTCOM स्पष्ट किया कि ड्रोन का इस्तेमाल केवल ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए हो रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप कहा कि अगर समझौता हुआ तो दो से तीन हफ्तों में तनाव खत्म हो सकता है।
NASA ट्रंप ने आर्टेमिस 2 मिशन की सफल लॉन्चिंग पर नासा को बधाई भी दी।

अमेरिकी जानकारों का मानना है कि ट्रंप का असली मकसद सैन्य दबाव बनाकर ईरान के अंदरूनी हालात में बदलाव लाना है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के ठोस संकेत नहीं दिख रहे हैं क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले को रोकने का फैसला केवल कूटनीतिक बातचीत के लिए मौका देने के लिए लिया गया था।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.