अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के पास इतनी ताकत है कि वह सिर्फ एक घंटे के अंदर ईरान के पुलों को गिरा सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान के बिजली और ऊर्जा केंद्रों को भी दोपहर के कुछ ही घंटों में खत्म किया जा सकता है।
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ट्रंप ने यह बात 6 जुलाई 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। उस समय पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकी हुई थी। ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि मामला बातचीत से सुलझे ताकि वहां के 9 करोड़ लोगों पर बुरा असर न पड़े, लेकिन अगर डील नहीं हुई तो वह इस काम को पूरा करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना पहले ही ईरान की नौसेना, वायुसेना, रडार और उनके नेताओं को खत्म कर चुकी है।
ईरान सरकार की प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप की इन धमकियों के बाद ईरान की तरफ से कड़ा जवाब आया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बागर जोल्कादर ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ट्रंप ने ईरानी लोगों से सम्मान के साथ बात नहीं की, तो ईरान उन्हें अपनी अलग भाषा में जवाब देगा।
- राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कीयन: जून 2026 में राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया X पर लिखा कि बिजली, पानी और ट्रांसपोर्ट जैसे नागरिक ढांचे को धमकी देना कमजोरी की निशानी है, ताकत की नहीं।
- ब्रिगेडियर जनरल अबोल्फज़ल शेकरची: उन्होंने साफ किया कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अगर हमला हुआ तो ईरान करारा जवाब देगा।
- विदेश मंत्री अब्बास अरागची: अप्रैल 2026 में उन्होंने कहा था कि नागरिक ढांचों पर हमला करने से ईरानी लोग हार नहीं मानेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान उन खाड़ी देशों के पुलों को भी निशाना बना सकता है जहाँ अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं।
इससे पहले अप्रैल और जून 2026 की रिपोर्ट्स में पेंटागन ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि परमाणु समझौते को ठुकराने के बाद अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक पुलों और पावर प्लांट पर सटीक हमले किए थे।
