DR Congo ने अपनी कीमती खदानों की सुरक्षा के लिए एक नई अर्धसैनिक फोर्स बनाने का ऐलान किया है। इस यूनिट का नाम ‘Mining Guard’ रखा गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट में अमेरिका और UAE पैसा लगाएंगे ताकि खनिजों की ढुलाई और उत्पादन को सुरक्षित किया जा सके।

🚨: Strait of Hormuz Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच बीच-बचाव कर रहा पाकिस्तान, क्या खुलेगा दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता

Mining Guard कब से होगी शुरू और इसमें कितने जवान होंगे?

DR Congo के जनरल इंस्पेक्टोरेट ऑफ माइन्स (IGM) ने बताया कि इस फोर्स की भर्ती मई 2026 से शुरू होगी। जून से दिसंबर 2026 के बीच जवानों की ट्रेनिंग चलेगी और दिसंबर 2026 तक पहली टुकड़ी तैनात हो जाएगी। शुरुआती दौर में 2,500 से 3,000 सशस्त्र जवानों को उतारा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2028 के अंत तक देश के 22 माइनिंग प्रांतों में 20,000 से ज्यादा गार्ड्स तैनात हों। सबसे पहले इसे ग्रैंड कटंगा और ग्रांडे ओरिएंटल इलाकों में लागू किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट में अमेरिका और UAE का क्या रोल है?

इस पूरी योजना के लिए कुल 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जाएगा। अमेरिका इस निवेश के जरिए कीमती खनिजों तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है ताकि उसे चीन जैसे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। अमेरिका और किनशासा के बीच दिसंबर 2025 में एक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी भी हुई थी। वहीं, UAE भी खनिजों की सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है और उसने फरवरी 2026 में अमेरिका के साथ एक निवेश डील की थी।

नई फोर्स आने से क्या बदलाव आएंगे?

इंसपेक्टर जनरल ऑफ माइन्स राफेल काबेंगेले ने कहा कि यह कदम माइनिंग सेक्टर की सफाई के लिए उठाया गया है। यह फोर्स खदानों में तैनात पुलिस, सेना और प्रेसिडेंशियल गार्ड्स की जगह लेगी। अभी कई जगहों पर नियमों के खिलाफ सेना तैनात रहती है, जिसे अब बदला जाएगा। इस नई यूनिट का मुख्य काम खनिजों के उत्पादन को सुरक्षित करना और उनकी सही तरीके से ढुलाई सुनिश्चित करना होगा ताकि भ्रष्टाचार और गलत तरीकों को खत्म किया जा सके।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.