अबू धाबी के बराकाह परमाणु संयंत्र पर हुए ड्रोन हमले ने सबको चौंका दिया है। भारत सरकार ने इस घटना पर अपनी गहरी चिंता जताई है और इसे बहुत गंभीर मामला बताया है। यह हमला न केवल यूएई की सुरक्षा बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए एक बड़ा खतरा है।

👉: Dubai में बेवजह हॉर्न बजाया तो लगेगा भारी जुर्माना, 400 दिरहम और ब्लैक पॉइंट्स का खतरा

बराकाह परमाणु प्लांट पर हमले की पूरी जानकारी

यह हमला रविवार, 17 मई 2026 को हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक तीन ड्रोन पश्चिमी सीमा से यूएई के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए थे। इनमें से दो ड्रोन को सुरक्षा बलों ने रोक लिया, लेकिन एक ड्रोन संयंत्र के आंतरिक परिसर के बाहर लगे एक विद्युत जनरेटर से जा टकराया, जिससे वहां आग लग गई। अबू धाबी मीडिया कार्यालय ने पुष्टि की कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ और रेडिएशन यानी विकिरण के स्तर पर भी कोई असर नहीं पड़ा। फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन ने यह साफ किया कि प्लांट की सुरक्षा प्रणालियों पर कोई असर नहीं पड़ा और सभी इकाइयां सामान्य रूप से काम कर रही हैं।

भारत और UAE का इस घटना पर क्या कहना है

भारत के विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 18 मई 2026 को बयान जारी कर कहा कि इस तरह के हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। भारत ने इसे खतरनाक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की। वहीं, UAE के विदेश मंत्रालय ने इसे एक बिना वजह किया गया आतंकवादी हमला बताया है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का बड़ा उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी इस पर गंभीर चिंता जताई है और परमाणु सुरक्षा को खतरे में डालने वाली सैन्य गतिविधियों को गलत बताया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

बराकाह परमाणु संयंत्र पर हमले से क्या कोई बड़ा खतरा हुआ?

नहीं, हमला आंतरिक परिसर के बाहर एक बिजली जनरेटर पर हुआ था। IAEA और स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि विकिरण का स्तर सामान्य है और प्लांट की सभी इकाइयां सुरक्षित रूप से काम कर रही हैं।

इस हमले के पीछे किसे जिम्मेदार माना जा रहा है?

अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन यूएई के कुछ अधिकारियों ने ईरान या उसके समर्थित प्रॉक्सी समूहों पर संदेह व्यक्त किया है।