दुबई के एयरपोर्ट्स से रेडियोएक्टिव सामान ले जाने और लाने की प्रक्रिया अब और सुरक्षित होगी। इसके लिए UAE की न्यूक्लियर रेगुलेशन अथॉरिटी (FANR) और दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी (DCAA) ने एक बड़ा समझौता किया है। इस कदम से हवाई यात्रा और सामान की आवाजाही में सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाएगा।
FANR और DCAA के बीच हुए समझौते में क्या है खास?
14 मई 2026 को FANR और DCAA ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसका मुख्य मकसद दुबई के एयरपोर्ट्स के जरिए रेडियोएक्टिव मटेरियल की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना है। इस समझौते के तहत दोनों संस्थाएं जानकारी साझा करेंगी और लाइसेंसिंग और अप्रूवल की प्रक्रिया में एक-दूसरे का साथ देंगी। साथ ही, सामान ले जाने वाली कंपनियों की जांच अब और बारीकी से की जाएगी ताकि सुरक्षा में कोई कमी न रहे।
रेडियोएक्टिव सामान भेजने और मंगवाने के क्या नियम हैं?
UAE में रेडियोएक्टिव मटेरियल के आयात, निर्यात या ट्रांजिट के लिए कुछ सख्त नियम तय किए गए हैं:
- परमिट की जरूरत: रेडियोएक्टिव सामान लाने या ले जाने के लिए FANR से जरूरी परमिट लेना अनिवार्य है।
- विदेशी एयरलाइंस: बाहरी देशों की एयरलाइंस केवल तभी यह सामान ले जा सकेंगी, जब उन्हें उनके अपने देश की सिविल एविएशन अथॉरिटी से मंजूरी मिली हो।
- साझा प्रक्रिया: दोनों विभाग अब साझा प्रक्रियाओं और तकनीकी क्षमता को बढ़ाने पर काम करेंगे।
FANR के डायरेक्टर-जनरल Christer Viktorsson ने बताया कि यह साझेदारी पर्यावरण और जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी है। वहीं, DCAA के डायरेक्टर-जनरल Mohammed Abdulla Lengawi ने कहा कि इससे दुबई की सिविल एविएशन सेक्टर में वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या रेडियोएक्टिव मटेरियल के लिए परमिट जरूरी है?
हाँ, UAE में रेडियोएक्टिव मटेरियल के आयात, निर्यात या ट्रांजिट के लिए FANR से अनुमति लेना अनिवार्य है।
यह समझौता कब हुआ और किनके बीच हुआ?
यह समझौता 14 मई 2026 को फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) और दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी (DCAA) के बीच हुआ।
