दुबई में एक नई और अनोखी इमारत ‘Al Shera’a’ का उद्घाटन हुआ है। His Highness Sheikh Mohammed bin Rashid Al Maktoum ने 15 मई 2026 को इसे दुनिया के सामने पेश किया। यह दुनिया की सबसे ऊंची, सबसे बड़ी और सबसे स्मार्ट नेट-पॉजिटिव सरकारी बिल्डिंग है, जो Dubai Electricity and Water Authority (DEWA) का नया मुख्यालय होगी।

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Al Shera’a बिल्डिंग की क्या खासियतें हैं?

इस इमारत को इस तरह बनाया गया है कि यह पर्यावरण के लिए फायदेमंद हो। इसे LEED Platinum और WELL Gold/Silver सर्टिफिकेशन मिलने वाला है, जो सेहत और पर्यावरण के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड माने जाते हैं। यह प्रोजेक्ट दुबई की ‘क्लीन एनर्जी स्ट्रेटजी 2050’ और ‘नेट जीरो कार्बन एमिशन स्ट्रेटजी 2050’ का हिस्सा है। इसका मुख्य मकसद 2050 तक दुबई की पूरी बिजली जरूरत को साफ ऊर्जा स्रोतों से पूरा करना है।

तकनीक और बिजली उत्पादन में यह कैसे अलग है?

Al Shera’a में बहुत आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 1,10,000 से ज्यादा स्मार्ट सेंसर और 3,200 नेटवर्क डिवाइस लगे हैं, जो रोजाना 19 लाख से ज्यादा ऑटोमेटेड कमांड देते हैं। बिजली उत्पादन के लिए इसमें दो बड़े फोटोवोल्टिक सिस्टम लगाए गए हैं, जिनसे सालाना 7,000 मेगावाट-घंटे (MWh) से ज्यादा बिजली पैदा होगी। इसकी कुल क्षमता 5 मेगावाट (MW) है। इस सिस्टम को चलाने के लिए Microsoft, Moro Hub और Johnson Controls जैसी कंपनियों ने AI और IoT तकनीक का इस्तेमाल किया है।

इस बड़े प्रोजेक्ट को किसने तैयार किया?

इस इमारत का मालिकाना हक DEWA के पास है। इसके पहले फेज का काम Dutco Balfour Beatty ने किया और बाद में Ghantoot Transport और Ghantoot Gulf Contracting की टीम ने काम संभाला। इसके मुख्य आर्किटेक्ट Eng. Adnan Saffarini रहे और KEO International Consultants ने डिजाइनिंग और सस्टेनेबिलिटी सेवाओं में मदद की। उद्घाटन के मौके पर H.H. Sheikh Ahmed bin Saeed Al Maktoum और H.H. Sheikh Mansoor bin Mohammed भी मौजूद रहे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

‘Al Shera’a’ इमारत क्या है और यह क्यों खास है?

यह DEWA का नया मुख्यालय है और दुनिया की सबसे ऊंची, बड़ी और स्मार्ट नेट-पॉजिटिव सरकारी इमारत है। यह पूरी तरह से सस्टेनेबिलिटी और आधुनिक AI तकनीक पर आधारित है।

यह बिल्डिंग अपनी बिजली कैसे बनाती है?

इसमें बिल्डिंग के बाहरी हिस्से (BIPV) और छत पर लगभग 8,400 फोटोवोल्टिक पैनल लगाए गए हैं। इसकी कुल क्षमता 5 मेगावाट है और यह सालाना 7,000 MWh से ज्यादा बिजली पैदा करती है।