दुबई के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में नौकरियों की भारी बढ़ोत्तरी होने वाली है। सरकार कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट्स शुरू करने की तैयारी में है, जिससे विदेशी प्रवासियों के लिए रोजगार के ढेरों मौके खुलेंगे। यह खबर उन लोगों के लिए बहुत अच्छी है जो दुबई में काम की तलाश कर रहे हैं।

दुबई में शुरू होने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स

सरकार ने कई ऐसी योजनाएं बनाई हैं जिनसे शहर की शक्ल बदल जाएगी। Dubai 2040 Urban Master Plan के तहत बुनियादी ढांचे और हरियाली को बढ़ाया जाएगा। Al Maktoum International Airport का विस्तार किया जा रहा है ताकि यह 2050 तक दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन सके। इसके अलावा, Elon Musk के साथ मिलकर Dubai Loop नाम का अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया जाएगा, जो 2026 के मध्य तक शुरू हो सकता है। Burj Azizi जैसी ऊंची इमारत और Therme Dubai जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।

किन्हें मिलेगी नौकरी और कितनी होगी डिमांड

काम की मांग सिर्फ बड़े इंजीनियरों के लिए ही नहीं, बल्कि हर स्तर के मजदूरों के लिए होगी। प्रोजेक्ट मैनेजर, सिविल इंजीनियर और आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल्स की बहुत जरूरत है। साथ ही, उन लोगों की भी भारी कमी है जो हाथ का काम जानते हैं, जैसे कि राजमिस्त्री (Masons), इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, कारपेंटर और वेल्डर। भारत से आने वाले प्रवासियों के लिए यह एक बड़ा मौका है क्योंकि यूएई की आबादी में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग विदेशी हैं और कंस्ट्रक्शन का काम काफी हद तक इन्हीं पर टिका है।

सैलरी और सुविधाओं का ब्यौरा

दुबई में सैलरी काफी प्रतिस्पर्धी है और टैक्स न होने की वजह से यह काफी फायदेमंद रहती है। अलग-अलग पदों के लिए अनुमानित मासिक सैलरी नीचे दी गई है:

पद (Position) सैलरी रेंज (AED) औसत सैलरी (Median)
सिविल इंजीनियर 7,000 – 20,000 12,000
प्रोजेक्ट मैनेजर 15,000 – 40,000 25,000
आर्किटेक्ट 8,000 – 28,000 15,000
क्वांटिटी सर्वेयर 14,000 – 22,000 14,000
कंस्ट्रक्शन वर्कर लगभग 6,812 6,812

इन सैलरी के अलावा, कई कंपनियां रहने के लिए घर या हाउसिंग अलाउंस भी देती हैं, जो 3,000 से 8,000 दिरहम तक हो सकता है। जिनके पास ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन जैसे LEED AP या Estidama के सर्टिफिकेट हैं, उन्हें 12 से 15 प्रतिशत ज्यादा सैलरी मिल सकती है।

नियम और मजदूरों के अधिकार

Ministry of Human Resources and Emiratisation (MoHRE) ने मजदूरों के हक के लिए कड़े नियम बनाए हैं। अब सभी प्राइवेट सेक्टर के कॉन्ट्रैक्ट फिक्स्ड-टर्म होंगे, जिनकी अधिकतम अवधि तीन साल होगी और इन्हें MoHRE के पास रजिस्टर करना जरूरी होगा। काम के घंटे तय हैं और ओवरटाइम करने पर बेसिक सैलरी का कम से कम 150 प्रतिशत भुगतान करना होगा।

मजदूरों की सुरक्षा के लिए Wage Protection System (WPS) लागू है, जिससे सैलरी सीधे बैंक खाते में आती है। गर्मियों में दोपहर के समय काम पर रोक (Mid-day Break) का नियम भी सख्ती से लागू रहता है ताकि मजदूरों को धूप से बचाया जा सके। कंपनी को रहने के लिए साफ-सुथरा ठिकाना और आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट देना अनिवार्य है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.