Dubai Court: दुबई कोर्ट ने पिता का 69 लाख रुपये का केस किया खारिज, बेटे के खिलाफ संपत्ति बिक्री का मामला हुआ बंद.

Aanya16 August 20262 min read56 viewsUAE
Dubai Court: दुबई कोर्ट ने पिता का 69 लाख रुपये का केस किया खारिज, बेटे के खिलाफ संपत्ति बिक्री का मामला हुआ बंद.

दुबई की अदालत ने एक पारिवारिक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पिता की तरफ से बेटे पर किए गए धोखाधड़ी और पैसों के लेन-देन के मुकदमे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह पूरा मामला 81 लाख दिरहम की पारिवारिक संपत्ति बेचने के बाद पैसों के बंटवारे को लेकर था, जिसमें पिता ने अपने ही बेटे पर 69 लाख दिरहम हड़पने का गंभीर आरोप लगाया था। दुबई सिविल कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया और कहा कि इस मामले पर पहले ही कानूनी फैसला आ चुका है, इसलिए इसे दोबारा कोर्ट में नहीं चलाया जा सकता है।

पुराने फैसले का हवाला देकर कोर्ट ने याचिका की खारिज

अदालत ने अपने आदेश में साफ किया कि कानून के मुताबिक अगर किसी मामले पर पहले ही फैसला सुनाया जा चुका है और दोनों पक्ष तथा विषय वही हैं, तो उस विवाद को दोबारा कोर्ट में नहीं उठाया जा सकता है। इसी नियम का हवाला देते हुए अदालत ने पिता की इस नई याचिका को सुनने योग्य नहीं माना। अदालत ने साफ कर दिया कि वह फंड के मैनेजमेंट और पैसों के गलत इस्तेमाल को लेकर लगाए गए पुराने आरोपों पर अब दोबारा कोई जांच या सुनवाई नहीं करेगी।

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पावर ऑफ Attorney के बाद शुरू हुआ था पूरा विवाद

यह पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ था जब पिता ने अपने बेटे को अपने सभी वित्तीय और संपत्ति से जुड़े कामों को संभालने के लिए एक जनरल पावर ऑफ Attorney दी थी। विवाद की असली जड़ वह संपत्ति थी जिसे पिता ने अपनी मां के साथ मिलकर विरासत में पाया था। इस संपत्ति को बेचने के बाद जो पैसे मिले, उनके बंटवारे को लेकर पिता और बेटे के बीच मनमुटाव शुरू हो गया था, जो बाद में अदालत तक पहुंच गया था।

पिता को भुगतने होंगे सारे कानूनी खर्च

दुबई कोर्ट के इस फैसले के बाद पिता को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया है कि मुकदमे का फैसला खिलाफ जाने की वजह से पिता को ही इस मामले से जुड़ा सारा कानूनी खर्च और कोर्ट की फीस चुकानी होगी। यूएई में रहने वाले कई प्रवासी और परिवार अक्सर इस तरह के संपत्ति विवादों में फंस जाते हैं, लेकिन अदालतों के पुराने फैसलों और नियमों के चलते मामलों का निपटारा कानून के दायरे में ही किया जाता है।

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