दुबई की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए एक डेवलपर को आदेश दिया है कि वह अपने पार्टनर को 1.37 मिलियन दिरहम वापस करे. यह मामला एक होटल यूनिट के मालिकाना हक को ट्रांसफर न कर पाने से जुड़ा है. इस फैसले से उन लोगों को राहत मिल सकती है जिन्होंने रियल एस्टेट में निवेश किया है और जिन्हें समय पर प्रॉपर्टी नहीं मिली.
मालिकाना हक न मिलने पर कोर्ट का फैसला
Dubai Real Estate Court ने पाया कि डेवलपर अपना बुनियादी वादा पूरा नहीं कर सका. यह मामला World Islands के Heart of Europe प्रोजेक्ट की एक होटल यूनिट का था. कोर्ट ने सेल और परचेज एग्रीमेंट के साथ-साथ उससे जुड़े होटल मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट को भी रद्द कर दिया है. कोर्ट का मानना था कि निवेशक काफी समय तक अपनी पूंजी और प्रॉपर्टी दोनों से वंचित रहा.
पैसे की वापसी और मुआवज़े का आदेश
अदालत ने आदेश दिया है कि डेवलपर निवेशक के सभी भुगतान, हैंडओवर फीस और प्रशासनिक शुल्क वापस करे. इसके अलावा, मानसिक और आर्थिक नुकसान के लिए अलग से मुआवज़ा देने को कहा गया है. डेवलपर ने यह दलील दी थी कि निवेशक को पहले ही 320,048 दिरहम का निवेश रिटर्न मिल चुका है, लेकिन सबूत न होने के कारण कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया.
| विवरण | राशि / दर |
|---|---|
| कुल वापसी राशि (Refund) | 1,370,749.12 दिरहम |
| नुकसान का मुआवज़ा (Compensation) | 150,000 दिरहम |
| कानूनी ब्याज दर (Legal Interest) | 5% सालाना |
| खारिज किया गया रिटर्न दावा | 320,048 दिरहम |
| कानूनी खर्च (Legal Expenses) | 1,000 दिरहम |
| कोर्ट फीस और लागत | डेवलपर द्वारा देय |
| रजिस्ट्रेशन शुल्क | Dubai Land Department नियमों के तहत |
यह मामला उन प्रवासियों और भारतीय निवेशकों के लिए ज़रूरी है जो Gulf देशों में प्रॉपर्टी में पैसा लगाते हैं. इससे यह पता चलता है कि अगर कोई डेवलपर मालिकाना हक ट्रांसफर करने में विफल रहता है, तो निवेशक कानूनी तौर पर अपना पैसा ब्याज समेत वापस पा सकता है.