दुबई की सड़कों पर डिलीवरी बाइक से होने वाले हादसों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। साल 2025 के अक्टूबर महीने तक करीब 962 हादसे दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल यह संख्या 854 थी। इस खतरे को देखते हुए दुबई प्रशासन ने डिलीवरी राइडर्स के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं ताकि उनकी और अन्य लोगों की जान बचाई जा सके।

दुबई पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, नियमों को तोड़ने वालों की संख्या भी बढ़ी है। साल 2024 में जहाँ 70,166 उल्लंघन मिले थे, वहीं 2025 के पहले नौ महीनों में यह आंकड़ा 78,386 तक पहुँच गया। दुबई पुलिस के मेजर जनरल सैफ मुहेयर अल मज़रूई ने बताया कि तेज़ रफ़्तार और गलत लेन में बाइक चलाने की वजह से ये हादसे हो रहे हैं।

लेन चलाने के नए नियम

1 नवंबर 2025 से डिलीवरी बाइक के लिए लेन के नियम बदल दिए गए हैं। अब राइडर्स को इन बातों का ध्यान रखना होगा:

  • जिन सड़कों पर पांच या उससे ज़्यादा लेन हैं, वहाँ डिलीवरी बाइक बाईं ओर की दो सबसे बाहरी लेन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी।
  • तीन या चार लेन वाली सड़कों पर राइडर्स सबसे बाईं लेन में नहीं चल सकेंगे।
  • दो या उससे कम लेन वाली सड़कों पर कोई पाबंदी नहीं है।

जुर्माना और पेनल्टी की लिस्ट

नियमों का पालन न करने वाले राइडर्स पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसका पूरा ब्यौरा नीचे दी गई टेबल में है:

उल्लंघन का प्रकार पहली बार जुर्माना दूसरी बार जुर्माना तीसरी बार कार्रवाई
गलत लेन का इस्तेमाल 500 AED 700 AED परमिट सस्पेंड
100 km/h से तेज़ रफ़्तार 200 AED 300 AED 400 AED

सुरक्षा के लिए अन्य बड़े बदलाव

सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए RTA और दुबई पुलिस ने कई नए कदम उठाए हैं। मार्च 2025 में यूएई ट्रैफिक कानून में बदलाव किया गया, जिससे स्कूटर और बाइक की सुरक्षा जांच और सख्त हो गई है। इसके अलावा, फरवरी 2026 में RTA ने पुरानी डिलीवरी बाइक के लिए नए इंस्पेक्शन स्टैंडर्ड लागू किए।

राइडर्स की थकान कम करने के लिए उनके लिए खास रेस्ट एरिया और स्टेशन बनाए गए हैं। साथ ही, प्रोफेशनल डिलीवरी वाहनों की पहचान के लिए अब पीले रंग की नंबर प्लेट का इस्तेमाल शुरू किया गया है। मार्च 2026 तक नए नियमों के तहत दुबई पुलिस ने 8,152 चालान काटे हैं।

राइडर्स को सुरक्षित चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए होंडा, अल-फुतैम ग्रुप और RTA ने मिलकर एक ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किया है। RTA के सीईओ हुसैन अल बन्ना ने कहा कि ये सभी बदलाव दुबई के इकोनॉमिक एजेंडा (D33) का हिस्सा हैं और तकनीकी स्टडी के बाद लागू किए गए हैं।