Dubai International Financial Centre (DIFC) ने अपने आर्बिट्रेशन कानून में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सरकार ने पब्लिक कंसल्टेशन शुरू किया है ताकि नियमों को और आधुनिक बनाया जा सके। इस कदम से दुबई में व्यापारिक विवादों को सुलझाने का तरीका अब पहले से ज़्यादा तेज़ और आसान हो जाएगा।

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क्यों बदले जा रहे हैं पुराने नियम

DIFC का मौजूदा आर्बिट्रेशन कानून साल 2008 में लागू किया गया था। करीब 18 साल बीत जाने के बाद अब इसे अपडेट करने की ज़रूरत महसूस की गई है ताकि यह आज के समय के हिसाब से चल सके। नए नियमों को तैयार करने के लिए सिंगापुर, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों के कानूनों का अध्ययन किया गया है। साथ ही ICC और DIAC जैसी बड़ी संस्थाओं के नियमों को भी आधार बनाया गया है।

क्या होंगे नए बदलाव

प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। इसमें कोर्ट को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह आर्बिट्रेशन शुरू करने के समय को बढ़ा सके। साथ ही, विवादों को सुलझाने वाले ट्रिब्यूनल की शक्तियों को भी बढ़ाया जाएगा ताकि वे ज़्यादा प्रभावी ढंग से फैसले ले सकें।

प्रस्तावित बदलाव असर और विवरण
ट्रिब्यूनल की शक्तियां फैसले लेने के लिए अधिक कानूनी अधिकार मिलेंगे
इमरजेंसी आर्बिट्रेटर तत्काल राहत के लिए नए प्रावधान लागू होंगे
कॉन्फिडेंशियलिटी गोपनीयता के नियमों में लचीलापन लाया जाएगा
थर्ड पार्टी फंडिंग तीसरे पक्ष से फंडिंग के लिए नए नियम और दंड तय होंगे
समय सीमा फैसलों को चुनौती देने की समय सीमा कम की जाएगी
भेदभाव पर रोक कानूनी प्रक्रिया में किसी भी तरह के भेदभाव को प्रतिबंधित किया जाएगा
मध्यस्थता ढांचा विवाद सुलझाने के लिए एक नया मेडिएशन फ्रेमवर्क आएगा

अधिकारियों ने क्या कहा

DIFC अथॉरिटी के चीफ लीगल ऑफिसर Jacques Visser ने बताया कि इस पब्लिक कंसल्टेशन का मकसद सिस्टम की कुशलता को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से ट्रिब्यूनल की शक्तियां बढ़ेंगी और इमरजेंसी आर्बिट्रेटर के फैसलों को लागू करना आसान होगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर DIFC की साख एक बड़े आर्बिट्रेशन हब के रूप में और मज़बूत होगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.