दुबई और मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण एक नई और गंभीर समस्या सामने आई है। युद्ध की घबराहट में कई विदेशी नागरिक अपने देश लौट रहे हैं और जल्दबाजी में अपने पालतू जानवरों को पीछे छोड़ रहे हैं। 1 मार्च के बाद से करीब 45 हजार ब्रिटिश नागरिक इस क्षेत्र को छोड़ चुके हैं। इस दौरान पालतू जानवरों को साथ ले जाने में होने वाली मुश्किलों के कारण उन्हें लावारिस छोड़ने के मामले तेजी से बढ़े हैं।

लोग अपने जानवरों को क्यों छोड़ रहे हैं

पशु कल्याण संस्थाओं के अनुसार लोग अक्सर पैनिक में देश छोड़ने का फैसला ले रहे हैं। जानवरों को अपने साथ ले जाने का खर्च और कागजी कार्रवाई काफी लंबी और महंगी है।

  • रिलोकेशन का खर्च: प्राइवेट कंपनियों द्वारा कागजी कार्रवाई के लिए 4,000 से 15,000 दिरहम तक लिए जा रहे हैं।
  • फ्लाइट चार्ज: एयरलाइंस में साथ जाने वाले पालतू जानवर का शुल्क लगभग 500 डॉलर प्रति जानवर है।
  • नियम: ब्रिटेन जैसे देशों में ले जाने के लिए 21 दिन पहले रेबीज का टीका और हेल्थ सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
  • उड़ानों की कमी: युद्ध के हालात के कारण उड़ानों की संख्या सीमित है, जिससे जानवरों को साथ ले जाना मुश्किल हो रहा है।

इन भारी खर्चों और समय की कमी के कारण लोग अपने जानवरों को साथ नहीं ले जा पा रहे हैं। कुछ लोग ओमान बॉर्डर के पास रेगिस्तानी इलाकों में अपने जानवरों को छोड़ रहे हैं क्योंकि बॉर्डर पार करने की अनुमति नहीं मिल रही है। पशु चिकित्सकों के अनुसार कुछ मालिकों ने भारी खर्च से बचने के लिए अपने स्वस्थ जानवरों को नींद की दवा (Euthanasia) देने का अनुरोध भी किया है।

जानवरों के बचाव के लिए उठाए जा रहे कदम

दुबई में पालतू जानवरों को लावारिस छोड़ना एक गैरकानूनी काम है और पकड़े जाने पर हजारों दिरहम का जुर्माना हो सकता है। इसके बावजूद पिछले कुछ हफ्तों में सड़कों पर और खंभों से बंधे जानवरों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

बढ़ती समस्या को देखते हुए दुबई नगर पालिका ने शहर में 12 AI-संचालित फीडिंग स्टेशन (Ehsan Stations) लगाए हैं ताकि सड़कों पर छोड़े गए जानवरों को भोजन मिल सके।

K9 Friends और दुबई स्ट्रीट किट्टीज जैसी संस्थाओं का कहना है कि उनके पास अब नए जानवरों को रखने के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं बची है। संस्थाओं में हर कमरा भरा हुआ है और उन्हें लगातार नए लावारिस जानवरों को लेकर फोन आ रहे हैं। आरएसपीसीए और पेटा यूके जैसी संस्थाएं ब्रिटिश सरकार से नियमों में ढील देने की मांग कर रही हैं ताकि लोग अपने जानवरों को आसानी से साथ ले जा सकें।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com