दुबई एयरपोर्ट ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए विदेशी एयरलाइंस के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. अब 20 अप्रैल से 31 मई 2026 तक विदेशी एयरलाइंस को दिन में सिर्फ एक ही उड़ान (आना-जाना) भरने की अनुमति होगी. इस नए नियम का सबसे ज्यादा असर भारतीय एयरलाइंस और यात्रियों पर पड़ा है, क्योंकि दुबई आने-जाने वाले लोगों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की होती है.

भारतीय एयरलाइंस पर क्या होगा असर?

इस फैसले से इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां काफी मुश्किल में हैं. फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने भारत सरकार को पत्र लिखकर दुबई अधिकारियों से इन प्रतिबंधों को हटाने का आग्रह किया है. इंडिगो ने बताया कि इस नियम की वजह से उनके विमानों का इस्तेमाल कम हो गया है और कामकाज में बड़ी रुकावट आई है. एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी कहा है कि भारी मांग होने के बावजूद उन्हें अपनी सेवाएं काफी कम करनी पड़ी हैं.

नियम की खास बातें और प्रभावित एयरलाइंस

दुबई एयरपोर्ट्स ने 27 मार्च 2026 को एक निजी ईमेल के जरिए एयरलाइंस को इस बदलाव की जानकारी दी थी. यह प्रतिबंध दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) और अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DWC) दोनों पर लागू रहेगा. जहां एमिरेट्स और फ्लाईदुबई जैसी लोकल कंपनियों पर इसका असर नहीं है, वहीं लुफ्थांसा और ब्रिटिश एयरवेज जैसी कंपनियों ने अपनी उड़ानें ही निलंबित कर दी हैं. प्रभावित उड़ानों का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:

एयरलाइन का नाम निर्धारित उड़ानों की संख्या
Air India और Air India Express 750 से अधिक
IndiGo 481
Saudia 480
Gulf Air 404

यात्रियों और कंपनियों के लिए चुनौतियां

भारतीय एयरलाइंस पहले से ही ईंधन की बढ़ी कीमतों और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण वित्तीय दबाव झेल रही थीं. अब इस नए नियम से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. 2025 में करीब 1.19 करोड़ भारतीय यात्री दुबई के रास्ते यात्रा कर चुके हैं, जिससे यह साफ है कि इस फैसले से आम यात्रियों को टिकट मिलने में दिक्कत आ सकती है और किराए में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.