दुबई ने अपनी व्यापारिक ताकत को साबित करते हुए एक नई पहल की है, जिससे क्षेत्रीय दिक्कतों के बावजूद सामान की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। दुबई कस्टम्स के ग्रीन कॉरिडोर इनिशिएटिव ने 1 मार्च से 30 जून 2026 के बीच 33.9 अरब दिरहम से ज्यादा का व्यापार सुगम बनाया है। इस पहल के जरिए 203,242 कंटेनर और 3.16 मिलियन टन से अधिक सामान दुनिया के 188 देशों से दुबई पहुँचाया गया।
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व्यापार में सहूलियत और नए नियम
दुबई कस्टम्स के डायरेक्टर जनरल डॉ. अब्दुल्ला बुसेनाद ने बताया कि यह पहल दुबई की बदलती परिस्थितियों में भी स्थिर रहने की क्षमता को दिखाती है। सामान की ढुलाई के लिए ओमान के रास्ते हट्टा बॉर्डर क्रॉसिंग का इस्तेमाल किया गया, जबकि फुजैराह और खोरफक्कान पोर्ट से भी सीधे दुबई के लिए माल आने की सुविधा दी गई। सामान के ट्रांजिट का समय 30 दिन से बढ़ाकर 90 दिन कर दिया गया है, जिससे व्यापारियों को काफी राहत मिली है। इसके साथ ही, सरकारी आदेशों के तहत कस्टम ड्यूटी में छूट और पेनल्टी में 80 प्रतिशत की कमी जैसे बड़े फैसले भी लिए गए हैं।
प्रमुख सामान और व्यापार के आंकड़े
इस कॉरिडोर का सीधा असर आम लोगों के लिए जरूरी सामान की सप्लाई पर भी पड़ा है। नीचे दी गई तालिका में प्रमुख व्यापारिक श्रेणियों की जानकारी है:
| सामान की श्रेणी | व्यापार मूल्य (दिरहम में) |
|---|---|
| खाद्य पदार्थ | 5.3 बिलियन |
| मशीनरी और इलेक्ट्रिकल सामान | 4.24 बिलियन |
| गाड़ियाँ | 2.21 बिलियन |
| प्लास्टिक | 1.5 बिलियन |
| लोहा और स्टील | 1 बिलियन से अधिक |
| दवाइयाँ | 446.6 मिलियन |
इस व्यवस्था के चलते प्राइवेट कंपनियों को 79 मिलियन दिरहम से ज्यादा की लिक्विडिटी मिली और 4,000 से अधिक नए ग्राहक दुबई के व्यापार से जुड़े। कस्टम क्लीयरेंस की रफ्तार 93 प्रतिशत बनी हुई है, जिससे निवेशकों का दुबई की आर्थिक स्थिरता पर भरोसा और मजबूत हुआ है।
