दुबई में भारतीय कारोबारियों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। साल 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच दुबई में रिकॉर्ड 3,995 नई भारतीय कंपनियां रजिस्टर्ड हुई हैं। इसके साथ ही दुबई में सक्रिय भारतीय कंपनियों की कुल संख्या बढ़कर 84,088 हो गई है। भारतीय व्यापारी दुबई को अपना पसंदीदा बिजनेस डेस्टिनेशन मान रहे हैं और वहां लगातार अपना पैर पसार रहे हैं।

दुबई में भारतीय कंपनियों की संख्या इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है?

दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक भारतीय कंपनियां यहां सबसे बड़ा विदेशी व्यापारिक समुदाय बनी हुई हैं। दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष और सीईओ मोहम्मद अली राशिद लूताह ने बताया कि जटिल वैश्विक अर्थव्यवस्था में कंपनियां ऐसे बाजारों को चुन रही हैं जो स्पष्टता, विश्वसनीयता और आगे बढ़ने की क्षमता देते हैं। भारतीय व्यवसायों का यह भरोसा दुबई की मजबूत नीतियों की वजह से है।

इसके पीछे कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • आसान नियम: दुबई में कंपनी स्थापित करने की प्रक्रिया बेहद सरल है, और यह मुख्य भूमि (Mainland) और फ्री जोन (Free Zone) दोनों के विकल्प देती है।
  • टैक्स में छूट: फ्री जोन में बिजनेस शुरू करने पर 100% विदेशी मालिकाना हक मिलता है और कोई कॉर्पोरेट या व्यक्तिगत आयकर नहीं देना होता है।
  • कानून में बदलाव: यूएई ने अपने वाणिज्यिक कंपनी कानून में बदलाव करके कंपनियों को आधिकारिक कॉर्पोरेट नागरिकता देने का प्रावधान किया है।

भारत और यूएई के बीच व्यापारिक संबंधों में कितना सुधार हुआ?

साल 2022 में दोनों देशों के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के बाद से भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 37% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दोनों देशों के बीच का कुल व्यापार अब 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। अब दोनों देशों की सरकारें साल 2032 तक इस व्यापारिक आंकड़े को बढ़ाकर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा और निवेश के नए समझौते

मई 2026 के मध्य में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी। यूएई ने भारत के बुनियादी ढांचे, आरबीएल बैंक और समुन्नति कैपिटल में 5 बिलियन डॉलर के भारी-भरकम निवेश की घोषणा की है। इसके अलावा, रणनीतिक रक्षा साझेदारी, एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े समझौतों पर भी सहमति बनी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

दुबई में कुल कितनी भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं?

मार्च 2026 के अंत तक दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स के तहत सक्रिय भारतीय सदस्यों की कुल संख्या 84,088 तक पहुंच गई है, जिससे भारतीय समुदाय वहां का सबसे बड़ा विदेशी व्यापारिक समुदाय बन गया है।

दुबई के फ्री जोन में व्यापार शुरू करने के क्या फायदे हैं?

दुबई के फ्री जोन में व्यापार शुरू करने पर भारतीय कारोबारियों को 100% विदेशी मालिकाना हक मिलता है और इसके साथ ही किसी भी तरह का कॉर्पोरेट या व्यक्तिगत आयकर नहीं देना पड़ता।

भारत और यूएई के बीच व्यापार का नया लक्ष्य क्या है?

सीईपीए समझौते के बाद दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है, जिसे साल 2032 तक बढ़ाकर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का संशोधित लक्ष्य रखा गया है।