दुबई में काम करने वाले सैकड़ों भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों पर अचानक बड़ा संकट मंडराने लगा है। दुबई के ईरानी अस्पताल के अचानक बंद होने से सैकड़ों नर्सों और डॉक्टरों की नौकरी चली गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। प्रभावित लोगों में अधिकांश केरल की नर्सें हैं जो अब वीजा नियमों के कारण बहुत परेशान हैं।
ईरानी अस्पताल बंद होने से क्यों पैदा हुआ संकट?
क्षेत्रीय तनाव के बीच दुबई का प्रसिद्ध ईरानी अस्पताल (Iranian Hospital) अचानक बंद हो गया है। इसके बंद होने से वहां काम करने वाले सैकड़ों भारतीय कर्मचारियों की नौकरी रातों-रात चली गई। इसमें सबसे अधिक संख्या केरल की नर्सों और अन्य मेडिकल स्टाफ की है। नौकरी जाने के साथ ही इन लोगों के सामने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने और नया काम खोजने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इन स्वास्थ्यकर्मियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी वहां के लोगों की पूरी लगन से सेवा की थी।
वीजा नियमों और ग्रेस पीरियड समाप्त होने का डर
नौकरी जाने के बाद कई कर्मचारियों का यूएई में रहने का ग्रेस पीरियड यानी छूट की अवधि खत्म होने वाली है। इसके खत्म होने के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ेगा जिससे उनका करियर खराब हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई का आव्रजन विभाग सुरक्षा कारणों का हवाला देकर नए रोजगार वीजा, आश्रित वीजा और विजिट वीजा को कथित तौर पर नामंजूर कर रहा है। इसके कारण प्रभावित श्रमिकों के लिए नौकरी बदलना या वीजा ट्रांसफर करना बहुत मुश्किल हो गया है। इस वजह से उनका मेडिकल लाइसेंस रद्द होने का भी खतरा है।
केरल सरकार ने केंद्र सरकार से क्या मांग की है?
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 7 और 8 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले को मानवीय स्तर पर सुलझाने की अपील की है। उन्होंने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि विदेश मंत्रालय और यूएई में भारतीय दूतावास के जरिए वहां के स्थानीय अधिकारियों से बातचीत की जाए। इस संकट से सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों, उनके बच्चों की पढ़ाई और उनके वित्तीय भविष्य पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दुबई में भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों के सामने क्या संकट आया है?
दुबई के ईरानी अस्पताल के बंद होने से सैकड़ों भारतीय नर्सों और डॉक्टरों की नौकरी चली गई है। अब वीजा नियमों और वीजा ट्रांसफर न होने के कारण उन पर देश छोड़ने और लाइसेंस रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है।
केरल सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
केरल के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के जरिए यूएई प्रशासन से बातचीत करने का आग्रह किया है ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके।
