दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने ‘Dubai-it’ नाम की एक नई पहल शुरू की है। इसका मकसद दुबई के काम करने के खास तरीके को आने वाली पीढ़ियों, सरकारी दफ्तरों और प्राइवेट कंपनियों में लागू करना है। इस मुहिम के जरिए काम में महारत और रफ्तार लाने पर जोर दिया गया है।
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यह ऐलान बुधवार, 17 जून 2026 को किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य की पीढ़ियां और संस्थान उसी जज्बे से काम करें जिससे दुबई ने आज अपनी पहचान बनाई है। इस फिलॉसफी का सीधा मतलब है कि किसी भी काम को बहुत कम समय में, लेकिन पूरी महारत और क्वालिटी के साथ पूरा किया जाए।
काम करने के नए नियम
इस पहल के तहत कुछ खास बातों पर जोर दिया गया है ताकि काम करने के तरीके में सुधार आए। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- रफ्तार का मतलब जल्दबाजी करना नहीं है।
- क्वालिटी का मतलब काम में देरी करना नहीं है।
- बिना काम के अमल (Execution) के किसी भी बड़े सपने या लक्ष्य की कोई कीमत नहीं है।
इस पूरी मुहिम का एक सीधा नारा है, “हम जो कहते हैं वो करते हैं, और जो करते हैं वो कहते हैं।”
शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने बताया कि इस पहल का मकसद सिर्फ काम पूरा करना नहीं बल्कि बड़े आइडियाज को हकीकत में बदलना है। वह चाहते हैं कि दुबई की सरकार और यहां की कंपनियां और भी ज्यादा लचीली और सक्रिय बनें। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इस तरह किया जाएगा जिससे आम लोगों का भला हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य तैयार हो सके।