दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अब दुबई में एन्फोर्समेंट अधिकारियों द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग और कैमरे के इस्तेमाल को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की गई है। इस नए नियम का सीधा असर सरकारी अधिकारियों के कामकाज और आम नागरिकों के अधिकारों पर पड़ेगा।
नया कानून कब से लागू हुआ और इसका उद्देश्य क्या है?
दुबई में यह नया नियम यानी एग्जीक्यूटिव काउंसिल रेजोल्यूशन नंबर (13) साल 2026 को 2 जून 2026 को जारी किया गया है। यह कानून सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से ही लागू हो गया है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य सरकारी काम में पारदर्शिता लाना, अधिकारियों के पेशेवर व्यवहार में सुधार करना और डिजिटल तकनीक की मदद से कानूनी प्रक्रियाओं को आसान बनाना है।
किन जगहों पर रिकॉर्डिंग करने पर लगा है सख्त प्रतिबंध?
नए नियम के अनुसार सुरक्षा और कानून व्यवस्था लागू करने वाले अधिकारियों को बेहद निजी जगहों पर रिकॉर्डिंग करने की बिल्कुल इजाजत नहीं होगी। इसमें निम्नलिखित स्थान शामिल हैं:
- निजी घर: किसी के भी व्यक्तिगत घर के भीतर वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की जा सकती।
- धार्मिक स्थल: मस्जिद, मंदिर या अन्य पूजा स्थलों के भीतर कैमरा इस्तेमाल करने पर रोक है।
- चेंजिंग रूम: कपड़े बदलने वाले कमरों और इसी तरह की अन्य संवेदनशील जगहों पर रिकॉर्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
वीडियो डेटा को सुरक्षित रखने के लिए क्या हैं दिशा-निर्देश?
रिकॉर्ड किए गए वीडियो और डेटा की सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों के लिए गाइडलाइन इस प्रकार हैं:
- अधिकारी किसी भी रिकॉर्डिंग को अपने पर्सनल फोन या किसी अन्य अनधिकृत डिवाइस में ट्रांसफर या स्टोर नहीं कर सकते हैं।
- सभी रिकॉर्डिंग्स को एन्क्रिप्टेड सिस्टम में सुरक्षित रखा जाएगा ताकि कोई इसके साथ छेड़छाड़ न कर सके।
- रिकॉर्डिंग शुरू करने से पहले वहां मौजूद व्यक्ति को इसकी सूचना देना जरूरी होगा।
- अधिकारियों को एन्फोर्समेंट की शक्तियां मिलने से पहले इस नियम के तहत विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी भी इस नियम के दायरे में आएंगे?
हां, वे सभी कर्मचारी जिन्हें सरकारी विभागों की तरफ से कानून लागू करने या जांच करने का काम सौंपा गया है, उन्हें इस नियम का पालन करना होगा।
क्या रिकॉर्डिंग को अदालत में सबूत माना जाएगा?
हां, इस नियम के तहत रिकॉर्ड की गई वीडियो सामग्री को अदालत में तब तक पुख्ता कानूनी सबूत माना जाएगा जब तक कि इसे गलत साबित न कर दिया जाए।
