दुबई और ओमान ने मिलकर एक नई पहल की है जिससे समुद्र और हवाई रास्ते से आने वाला सामान अब बिना किसी रुकावट के पहुंच सकेगा। 14 मार्च 2026 से लागू हुए इस ‘ग्रीन कॉरिडोर’ का मकसद लाल सागर में हो रही दिक्कतों के बीच व्यापार को सुरक्षित रखना है। इससे उन कंपनियों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी जिनका सामान रास्ते में फंसा हुआ था या जिन्हें देरी का सामना करना पड़ रहा था।

ग्रीन कॉरिडोर से कैसे होगा माल का आना-जाना?

इस नए सिस्टम के तहत जो सामान दुबई के Jebel Ali Port या Dubai International Airport आने वाला था, लेकिन उसे ओमान के बंदरगाहों या एयरपोर्ट पर भेज दिया गया है, उसे अब सड़क मार्ग से लाया जाएगा। इसके लिए खास नियम बनाए गए हैं ताकि सुरक्षा और तेजी दोनों बनी रहे।

  • सामान को ओमान के बॉर्डर से दुबई लाने के लिए सीलबंद ट्रकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • ये ट्रक Al Wajajah और Hatta बॉर्डर के जरिए दुबई में दाखिल होंगे।
  • ओमान में ही कस्टम ट्रांजिट डिक्लेरेशन फाइल कर दी जाएगी और बॉर्डर पर सील की जांच होगी।
  • दुबई से बाहर जाने वाले सामान को भी ओमान के बंदरगाहों के जरिए भेजा जा सकेगा।

व्यापारियों और लॉजिस्टिक सेक्टर को क्या होगा फायदा?

इस फैसले से उन भारतीय और अन्य प्रवासियों को फायदा होगा जो दुबई में लॉजिस्टिक, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट या ट्रेडिंग के बिजनेस से जुड़े हैं। सामान की सप्लाई चेन नहीं टूटेगी जिससे बाजार में जरूरी चीजों की कमी नहीं होगी।

संबंधित संस्था मुख्य भूमिका
Dubai Customs नियमों को लागू करना और जांच करना
Oman Customs कस्टम मंजूरी में तेजी लाना
DP World ट्रकों और डेटा का तालमेल बिठाना
EGA एल्युमीनियम एक्सपोर्ट के लिए नया रूट इस्तेमाल करना

दुबई कस्टम्स का कहना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों को दिखाता है। इससे समुद्री रास्तों में हो रही परेशानियों का हल निकलेगा और व्यापार की गति बनी रहेगी। हवाई कार्गो के लिए पहले से ही जानकारी देना जरूरी कर दिया गया है ताकि सीमा पर जांच के दौरान देरी न हो। इस व्यवस्था में ज्यादातर सामान शामिल हैं लेकिन कुछ विशेष चीजों को इससे बाहर भी रखा गया है।