दुबई अब दुनिया को सिखाएगा कि डिजिटल सिस्टम को कैसे सुरक्षित रखा जाए। दुबई इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटी सेंटर (DESC) ने एक ऐसी ग्लोबल रिपोर्ट तैयार करने में मदद की है जो डिजिटल दुनिया के छिपे हुए खतरों के बारे में बताती है। खास बात यह है कि मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र से केवल दुबई ही इस अंतरराष्ट्रीय मुहिम का हिस्सा बना है।
🗞️: UAE सरकार का बड़ा फैसला, Nafis प्रोग्राम 2040 तक बढ़ा, अब युवाओं को मिलेगा ज़्यादा सैलरी सपोर्ट।
क्या है यह ग्लोबल रिपोर्ट और दुबई की इसमें क्या भूमिका है?
इस रिपोर्ट का नाम ‘When Digital Systems Fail: The Hidden Risks of Our Digital World’ है। इसे International Telecommunication Union (ITU), UN Office for Disaster Risk Reduction (UNDRR) और Sciences Po ने मिलकर जारी किया है। दुबई ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में अहम योगदान दिया है ताकि यह समझा जा सके कि अगर बड़े डिजिटल सिस्टम फेल होते हैं, तो उसका असर पूरी दुनिया पर क्या पड़ेगा। DESC के चीफ एग्जीक्यूटिव यूसुफ हमद अल शैबानी ने कहा कि दुबई का मकसद डिजिटल दुनिया को और ज्यादा मजबूत बनाना है ताकि जरूरी सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहें।
साइबर सुरक्षा के लिए UAE सरकार और कौन से बड़े कदम उठा रही है?
UAE सरकार केवल एक रिपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि कई ग्लोबल कंपनियों के साथ हाथ मिला रही है ताकि देश की सुरक्षा पुख्ता हो सके।
- UAE Cyber Security Council ने Dragos Inc. के साथ मिलकर OT साइबर सिक्योरिटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किया है।
- Siemens के साथ मिलकर क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए समझौता किया गया है।
- Tawazun Council और Lockheed Martin ने भी UAE में एक साइबर सिक्योरिटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए हाथ मिलाया है।
डॉ. मोहम्मद अल कुवैती ने बताया कि UAE का लक्ष्य एक ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम बनाना है जो खतरों को जल्दी पहचान सके और उनसे तुरंत निपट सके। यह सब नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्ट्रेटजी के तहत किया जा रहा है।
डिजिटल पहचान और ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए क्या सलाह दी गई?
साइबर सुरक्षा काउंसिल ने साफ किया है कि डिजिटल पहचान (Digital Identity) को बचाना अब बहुत जरूरी हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक, साल के पहले छह महीनों में डिजिटल पहचान को निशाना बनाने वाले साइबर हमलों में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। काउंसिल ने बताया कि अगर लोग मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) यानी दोहरे वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करें, तो 99 प्रतिशत से ज्यादा पहचान से जुड़े हमलों को आसानी से रोका जा सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दुबई ने किस अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में योगदान दिया है?
दुबई ने ITU, UNDRR और Sciences Po द्वारा जारी ‘When Digital Systems Fail: The Hidden Risks of Our Digital World’ रिपोर्ट में योगदान दिया है, जिसमें वह इकलौता MENA देश था।
डिजिटल पहचान को बचाने के लिए UAE सरकार ने क्या सुझाव दिया है?
सरकार ने मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) के इस्तेमाल की सलाह दी है, क्योंकि यह पहचान से जुड़े 99 प्रतिशत से ज्यादा साइबर हमलों को रोकने में कारगर है।