दुबई के रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की वजह से कई इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आई है। मार्च 2026 में यह गिरावट साल 2020 के बाद पहली बार दर्ज की गई है, जिससे अब विदेशी निवेशकों के लिए कम कीमत पर घर और जमीन खरीदना संभव हो गया है।

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दुबई में प्रॉपर्टी के दाम क्यों घटे और क्या है वजह?

बाजार में आई इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण क्षेत्र में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब निवेश करने में सावधानी बरत रहे हैं। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी वैलूस्ट्रैट के मुताबिक, मार्च में रेसिडेंशियल प्राइस इंडेक्स में 5.9% की कमी आई है।

  • मार्केट करेक्शन: कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि 2020 के बाद से कीमतें 70% तक बढ़ चुकी थीं, इसलिए अब बाजार वापस संतुलन की ओर आ रहा है।
  • अन्य कारण: मार्च महीने में ईद-उल-फितर की छुट्टियों और यूएई में हुई भारी बारिश की वजह से भी प्रॉपर्टी की बिक्री पर असर पड़ा है।
  • भविष्य का अनुमान: बेटरहोम्स के सीईओ लुईस हार्डिंग के अनुसार, कीमतें तुरंत पुराने स्तर पर नहीं लौटेंगी क्योंकि आबादी की वृद्धि धीमी होने से मांग कम हो सकती है।

प्रॉपर्टी की बिक्री और लेन-देन के आंकड़े

मार्च 2026 के आंकड़ों को देखें तो फरवरी के मुकाबले लेन-देन की संख्या और कुल कीमत दोनों में बड़ी कमी आई है। खासकर पुराने घरों (सेकेंडरी मार्केट) की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज हुई है।

विवरण आंकड़े/विवरण
आवासीय प्रॉपर्टी कीमतों में गिरावट लगभग 5.9% (मार्च 2026)
रियल एस्टेट इंडेक्स में कमी लगभग 20% (कुछ रिपोर्टों के अनुसार)
बिक्री का कुल मूल्य 37.2 बिलियन दिरहम ($10.1 बिलियन)
मूल्य में गिरावट (फरवरी के मुकाबले) लगभग 20%
लेन-देन की संख्या 16,000 से घटकर 13,000 के करीब
सेकेंडरी मार्केट बिक्री में कमी लगभग 30%
2020 के बाद कुल बढ़ोतरी 70% से अधिक

क्या विदेशियों के लिए अब घर खरीदना आसान हुआ है?

दुबई भूमि विभाग (DLD) के नियमों के मुताबिक, विदेशी नागरिक तय किए गए इलाकों में फ्रीहोल्ड आधार पर संपत्ति के पूर्ण मालिक बन सकते हैं या 99 साल के लिए लीजहोल्ड प्रॉपर्टी ले सकते हैं। विदेशी स्वामित्व के नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कीमतों में कमी आने की वजह से अब निवेश करना सस्ता हो गया है।

ब्रोकरों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व का संघर्ष लंबा खिंचता है तो बिक्री और कम हो सकती है, लेकिन दुबई की मजबूत आर्थिक बुनियाद के कारण लंबे समय में बाजार फिर से संभल जाएगा। भारत सहित अन्य देशों से आने वाले निवेशक अब कम बजट में बेहतर विकल्प तलाश सकते हैं।