दुबई में रोजी-रोटी कमाने गए पंजाबी युवाओं की मौत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। एक ताजा मामले में परिवार के आपसी विवाद की वजह से शव एयरपोर्ट पर ही रुक गया है। यह स्थिति उन परिवारों के लिए और भी दुखद हो गई है जो पहले से ही आर्थिक तंगी और गहरे शोक में डूबे हुए हैं।

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शव को भारत लाने में क्या दिक्कतें आ रही हैं?

दुबई से शव को भारत वापस लाने की प्रक्रिया काफी खर्चीली होती है। कई परिवार इतने गरीब हैं कि वे शव को घर लाने का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। इसके अलावा, जब मौत संदिग्ध हालात में होती है, तो Dubai Authorities और स्थानीय पुलिस की जांच में काफी समय लगता है। कुछ मामलों में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी विवाद होने के कारण कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हो पाती, जिससे शव एयरपोर्ट या मोर्चरी में ही रुक जाता है।

मदद के लिए कौन सी संस्थाएं और सरकारी विभाग आगे आए हैं?

ऐसे मुश्किल समय में Sarbat Da Bhala Charitable Trust और S.P.S. Oberoi जैसे लोग उन परिवारों की मदद कर रहे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। कई सांसद और विधायक Ministry of External Affairs से संपर्क कर रहे हैं ताकि कागजी काम जल्दी पूरा हो और शव जल्द से जल्द भारत पहुंच सके। पीड़ित परिवार अक्सर पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से भी आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं।

हाल के दिनों में सामने आए मुख्य मामले

साल 2025 और 2026 में कई दुखद घटनाएं दर्ज की गई हैं। 15 अप्रैल 2026 को प्रदीप सिंह की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई। 28 मार्च 2026 को कुलवंत सिंह की संदिग्ध हालत में जान चली गई। वहीं, मोहम्मद रमजान और बलविंदर सिंह के मामलों में भी परिवार शव वापस लाने के लिए कानूनी और वित्तीय संघर्ष कर रहे हैं। इन सभी मामलों में अंतरराष्ट्रीय नियमों और स्थानीय जांच के कारण देरी देखी गई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

दुबई से शव वापस लाने में देरी क्यों होती है?

देरी के मुख्य कारण स्थानीय पुलिस की जांच, अंतरराष्ट्रीय कागजी कार्रवाई और परिवार की आर्थिक तंगी होती है। कुछ मामलों में परिवार के आपसी विवाद भी बाधा बनते हैं।

क्या प्रवासियों के परिवार को सरकारी मदद मिलती है?

परिवार Ministry of External Affairs और राज्य सरकार से मदद मांग सकते हैं। कई बार सांसद और विधायक कागजी कार्रवाई तेज कराने के लिए सरकारी विभागों से संपर्क करते हैं।