दुबई की एक अदालत ने एक महिला को अपनी सहेली की निजी तस्वीर बिना अनुमति शेयर करने के लिए 85,000 दिरहम मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला डिजिटल प्राइवेसी यानी निजी जानकारी की गोपनीयता के उल्लंघन से जुड़ा है। अदालत के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि UAE में ऑनलाइन प्राइवेसी के नियमों को बहुत सख्ती से लागू किया जा रहा है।

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जानकारी के मुताबिक, महिला ने अपनी दोस्त की एक संवेदनशील तस्वीर का स्क्रीनशॉट बिना उसकी मर्जी के दूसरों को भेजा था। इस हरकत की वजह से कानूनी कार्रवाई हुई और अब उसे भारी जुर्माना भरना पड़ेगा। यह मामला उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दूसरों की निजी सामग्री बिना इजाजत शेयर करते हैं।

UAE के सख्त प्राइवेसी कानून

UAE में डिजिटल प्राइवेसी को लेकर बहुत कड़े कानून हैं। UAE साइबर क्राइम कानून (Federal Decree Law No. 34 of 2021) के आर्टिकल 44 के तहत किसी की प्राइवेसी या पारिवारिक जीवन में दखल देना अपराध है। इसमें 1.5 लाख से 5 लाख दिरहम तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल की सजा हो सकती है।

इसके अलावा UAE पेनल कोड (Federal Decree-Law No. 31 of 2021) और कॉपीराइट कानून भी बिना अनुमति फोटो खींचने, रिकॉर्डिंग करने या उसे सार्वजनिक करने को गलत मानते हैं। कानून के मुताबिक, किसी की निजी जानकारी या फोटो को बिना उसकी सहमति के फैलाना दंडनीय अपराध है।

प्रवासियों के लिए बड़ा सबक

दुबई और अन्य अमीरात में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों को इन नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी के प्राइवेट मैसेज, वॉयस नोट, फोटो या स्क्रीनशॉट बिना अनुमति शेयर करने पर गंभीर कानूनी संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे मामलों में जेल के साथ-साथ गैर-नागरिकों को देश से निकाला (deport) भी जा सकता है।

हाल ही के कुछ और फैसलों पर नजर डालें तो:

  • जून 2026 में एक व्यक्ति को वकील की फोटो बिना इजाजत डालने और अपमानजनक पोस्ट करने पर 80,000 दिरहम जुर्माना देना पड़ा।
  • मई 2026 में एक भारतीय प्रवासी पर अपनी महिला रिश्तेदार की फोटो बिना सहमति शेयर करने के लिए 3,000 दिरहम का जुर्माना लगाया गया।
  • मार्च 2026 में एक महिला को इंस्टाग्राम पर दूसरी महिला की फोटो डालने के लिए 50,000 दिरहम मुआवजा देने का आदेश मिला।

अटॉर्नी-जनरल Hamad Saif Al Shamsi ने पहले भी चेतावनी दी है कि किसी भी घटना की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर न फैलाएं। उन्होंने कहा कि ऐसी सामग्री से जनता में घबराहट फैल सकती है और यह कानून का उल्लंघन है।