वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध की वजह से कई भारतीय कंपनियों के बिजनेस पर बुरा असर पड़ा है. इस मुश्किल वक्त में कंपनियों की मदद के लिए भारत सरकार ने ECLGS 5.0 स्कीम शुरू की है. CRISIL Ratings की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना से उन कंपनियों को समय पर राहत मिलेगी जिन्हें कामकाज चलाने के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत है.

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इस स्कीम को यूनियन कैबिनेट ने 5 मई 2026 को मंजूरी दी थी और इसके नियम 8 मई 2026 से लागू हो गए थे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 9 जून 2026 तक इस योजना के तहत 1.06 लाख से ज्यादा गारंटी दी जा चुकी हैं, जिनकी कुल कीमत ₹48,484.26 करोड़ है. इसमें सबसे ज्यादा फायदा छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSMEs को मिला है.

लोन और गारंटी से जुड़ी जरूरी जानकारी

इस स्कीम के तहत कंपनियों को उनकी वर्किंग कैपिटल की जरूरत के हिसाब से पैसा दिया जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रखा गया है ताकि कंपनियों को 5 से 7 दिनों के अंदर मदद मिल सके. फाइनेंस डिपार्टमेंट के जॉइंट सेक्रेटरी मनोज मुत्ताथिल अय्यप्पन ने बताया कि सरकार का लक्ष्य इस स्कीम के जरिए ₹2.55 लाख करोड़ का क्रेडिट फ्लो देना है.

विवरण MSME और अन्य कंपनियां एयरलाइन सेक्टर
लोन की राशि वर्किंग कैपिटल का 20% तक वर्किंग कैपिटल का 20% तक
अधिकतम लिमिट ₹100 करोड़ तक ₹1,500 करोड़ तक
सरकारी गारंटी 100% (MSME के लिए) / 90% (अन्य के लिए) 90% गारंटी
लोन की अवधि 5 साल 7 साल
मोरेटोरियम (किस्त छूट) 1 साल 2 साल
प्रोसेसिंग फीस कोई फीस नहीं कोई फीस नहीं
आवेदन का तरीका जन समर्थ पोर्टल (Jan Samarth Portal) जन समर्थ पोर्टल (Jan Samarth Portal)

CRISIL Ratings के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस मदद से कंपनियों का कर्ज करीब 10% तक बढ़ सकता है, लेकिन ज्यादातर कंपनियां साल 2028 और 2029 तक इस कर्ज को चुकाने में सक्षम होंगी. रेटिंग एजेंसी के डायरेक्टर हिमांक शर्मा ने कहा कि इस स्कीम का कितना इस्तेमाल होता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वेस्ट एशिया का संघर्ष कितने समय तक चलता है और कितना गंभीर रहता है.

इस योजना का लाभ उठाने के लिए यह जरूरी है कि कंपनियों के पास 31 मार्च 2026 तक वर्किंग कैपिटल लिमिट रही हो और उनका खाता SMA-2 कैटेगरी में न आता हो. इस पूरी प्रक्रिया को नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) मैनेज कर रही है, जबकि सरकारी और प्राइवेट बैंक व NBFCs इस लोन को बांटने का काम कर रहे हैं.