मिस्र के दमियत्ता बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमले को लेकर चल रही चर्चाओं पर वहां की सरकार ने अपना पक्ष साफ कर दिया है। मिस्र के सूचना मंत्री ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ है। 29 जुलाई 2026 को हुई इस घटना में बंदरगाह पर खड़े दो जहाजों में आग लग गई थी, जिसके बाद से ही उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई है।
हमले की पूरी जानकारी
मिस्र के मंत्रिमंडल ने यह पुष्टि की है कि Energos Winter और GasLog Salem नाम के दो जहाजों को निशाना बनाया गया था। यह हमला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह पर हुआ, जो ऊर्जा और एलएनजी आयात के लिए जाना जाता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। प्रधानमंत्री Mostafa Madbouly ने सुरक्षा एजेंसियों को इस मामले की गहराई से जांच करने के आदेश दिए हैं ताकि भविष्य में देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
बंदरगाह अभी पूरी तरह से काम कर रहा है और वहां जहाजों की आवाजाही जारी है। इस हमले की जिम्मेदारी फिलहाल किसी ने नहीं ली है। यमन के हूती समर्थित विदेश मंत्रालय ने इस मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इसे इजरायल की साजिश बताते हुए कहा कि मिस्र की सुरक्षा उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने भी इस हमले की निंदा की है और मिस्र के साथ एकजुटता दिखाई है। फिलहाल अधिकारी बरामद किए गए ड्रोन के मलबे की जांच कर रहे हैं ताकि हमले के बारे में और अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सके।
