खाड़ी देशों में बढ़ते सैन्य तनाव और हाल ही में हुए ईरान के मिसाइल हमलों के बाद मिस्र (Egypt) और GCC (Gulf Cooperation Council) के बीच एक अहम बैठक हुई है। यह बैठक सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 16 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी। मिस्र के विदेश मंत्री डॉ. बद्र अब्देलत्ती और GCC के महासचिव जसिम मोहम्मद अलबुदैवी ने अरब देशों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चल रहे संकट को रोकना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

बैठक में लिए गए अहम फैसले और रणनीतियां

इस हाई-लेवल मीटिंग में कई सुरक्षा नीतियों पर चर्चा हुई जो सीधे तौर पर खाड़ी देशों के हालात सुधारने से जुड़ी हैं। दोनों देशों के अधिकारियों ने सुरक्षा के मोर्चे पर एक साथ काम करने की बात कही है।

  • मिस्र के विदेश मंत्री ने साफ किया कि खाड़ी देशों की सुरक्षा मिस्र और पूरी अरब दुनिया की राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अटूट हिस्सा है।
  • बैठक में 1950 की अरब लीग साझा रक्षा संधि को लागू करने और एक जॉइंट अरब फोर्स (Joint Arab force) बनाने पर जोर दिया गया ताकि आने वाले खतरों से निपटा जा सके।
  • लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने पर खास फोकस किया गया।
  • आपसी सहयोग को लगातार मजबूत रखने के लिए 2024-2028 के जॉइंट एक्शन प्लान पर फिर से मुहर लगाई गई।

व्यापार और आम लोगों की सुरक्षा पर असर

मध्य पूर्व में हो रहे इन हमलों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। समुद्री रास्तों पर हमले होने से स्वेज नहर जैसे अहम रास्तों से होने वाली कमाई कम हुई है। मिस्र ने अधिकारियों को बताया कि स्वेज नहर के रेवेन्यू में 9 बिलियन डॉलर का बड़ा नुकसान हुआ है। इन हालातों को देखते हुए दोनों पक्षों ने लाल सागर कॉरिडोर को स्थिर करने की जरूरत पर बल दिया है ताकि वैश्विक व्यापार में रुकावट ना आए।

इसके अलावा GCC नेतृत्व ने मिस्र के उस फैसले की तारीफ की जिसमें फिलिस्तीनियों को विस्थापित करने की किसी भी योजना का विरोध किया गया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां के निवासियों के लिए यह बैठक काफी अहम है क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता का भरोसा मिलता है।