मिस्र और कतर ने रविवार, 28 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने की बात कही है। दोनों देशों ने कहा कि हाल ही में साइन हुए समझौते (MoU) के बाद अब तनाव कम करने के लिए जरूरी कदमों को लागू करना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा करने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी।

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क्या है इस्लामाबाद समझौता (MoU)?

17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक अंतरिम समझौते पर साइन किए थे, जिसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ कहा गया। इस समझौते की मुख्य बातें ये थीं:

  • दोनों देशों के बीच युद्धविराम (ceasefire) लागू करना।
  • Strait of Hormuz को फिर से खोलना ताकि व्यापारिक जहाजों का आना-जाना शुरू हो सके।
  • ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी सैन्य नाकाबंदी हटाना।
  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों का समय देना।

बढ़ता तनाव और सैन्य हमले

समझौते के बावजूद हालात अभी भी नाजुक हैं। 28 जून को राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने युद्धविराम का पालन नहीं किया, तो अमेरिकी सेना अपना काम पूरा करेगी। इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान की Revolutionary Guards ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए।

इससे पहले 27 जून को बहरीन पर ईरानी ड्रोन हमले की खबर आई थी, जिसकी कतर, मिस्र और जॉर्डन ने कड़ी निंदा की थी। कतर ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था।

कूटनीतिक कोशिशें

इस तनाव को कम करने के लिए 21 जून को स्विट्जरलैंड में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच सीधी बातचीत शुरू हुई, जिसमें कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। मिस्र के विदेश मंत्री Badr Abdelatty और कतर के प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने बार-बार कहा है कि शांति और स्थिरता के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।

वहीं, ईरान के सैन्य सलाहकार Mohsen Rezaei ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौते का उल्लंघन हुआ, तो उसका जवाब बहुत कड़ा होगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी साफ कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा।