Erbil Airport के पास अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ड्रोन हमला, इराक में हाई अलर्ट जारी
इराक के Erbil International Airport के पास मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस पर एक बार फिर ड्रोन से हमला किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने 9 मार्च को इस नए हमले की पुष्टि की है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों के बीच इस घटना को काफी अहम माना जा रहा है।
हमले में क्या नुकसान हुआ और कौन है जिम्मेदार?
शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार 9 मार्च को हुए इस ड्रोन हमले में किसी भी तरह के जान-माल के बड़े नुकसान की खबर नहीं है। मिलिट्री बेस के ढांचे को भी कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इलाके की कड़ी निगरानी कर रही हैं।
इससे पहले 7 और 8 मार्च की रात को भी एयरपोर्ट के बाहरी इलाके में एक बड़ा ड्रोन हमला हुआ था। उस हमले में कुर्दिस्तान रीजनल सिक्योरिटी फोर्स के एक जवान वेलात ताहिर की मौत हो गई थी और एक अन्य कर्मचारी घायल हुआ था।
इन हमलों के पीछे इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक का हाथ बताया जा रहा है। यह ईरान समर्थित मिलिशिया का एक समूह है। इसके एक गुट गार्डियंस ऑफ ब्लड ने हाल ही में ऐसे कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। इसके अलावा ईरान की सेना पर भी प्रत्यक्ष रूप से ड्रोन हमलों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।
आम लोगों और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका क्या असर है?
लगातार हो रहे इन हमलों के बाद कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष मसूद बारजानी ने इराक की संघीय सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि इराक की जमीन का इस्तेमाल गैरकानूनी गुटों द्वारा ऐसे हमलों के लिए बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
बगदाद में मौजूद अमेरिकी एंबेसी ने खतरे को देखते हुए एक चेतावनी जारी की है। इसमें कहा गया है कि ईरान समर्थित गुट कुर्दिस्तान क्षेत्र के उन होटलों को निशाना बना सकते हैं जहां विदेशी लोग और पर्यटक ठहरते हैं। Erbil Arjaan by Rotana जैसे होटलों और तेल ठिकानों के पास भी खतरे की आशंका है।
इतने तनाव के बावजूद Erbil International Airport पर फ्लाइट्स का संचालन जारी है पर पूरे एयरपोर्ट को हाई-अलर्ट पर रखा गया है। इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर बाजारों पर भी दिख रहा है। हालिया तनाव के कारण यूरोप में गैस की कीमतें 45 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।





