Erbil में ड्रोन हमला, ईरान से आए दो कॉम्बैट ड्रोन ने KRG प्रधानमंत्री के ऑफिस को बनाया निशाना.

Praggya Singh sabal17 August 20262 min read68 viewsWorld
Erbil में ड्रोन हमला, ईरान से आए दो कॉम्बैट ड्रोन ने KRG प्रधानमंत्री के ऑफिस को बनाया निशाना.

सोमवार, 17 अगस्त 2026 की सुबह इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में एक बड़ा सुरक्षा संकट खड़ा हो गया, जब ईरान में बने दो 'Hadid-110' कॉम्बैट ड्रोन ने एरबिल के पास पिरमाम इलाके में हमला कर दिया। यह हमला स्थानीय समयानुसार ठीक 12:28 a.m. पर हुआ, जो एरबिल शहर से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इस खतरनाक हमले में कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार (KRG) के प्रधानमंत्री मंसूर बारजानी के कार्यालय और कुर्दिस्तान क्षेत्र की सुरक्षा और खुफिया एजेंसी के प्रमुख के निवास को निशाना बनाया गया था। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों में हड़कंप मच गया।

कुर्दिस्तान काउंटर-टर्ेररिज्म सर्विस ने की पुष्टि

कुर्दिस्तान काउंटर-टर्ेररिज्म सर्विस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ये दोनों ड्रोन सीधे तौर पर ईरान की सीमा से लॉन्च किए गए थे। गनीमत यह रही कि इस बड़े हवाई हमले में किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ और न ही किसी को चोट आई। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि हमले के दौरान किसी भी इमारत को भारी भौतिक नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन इस तरह की घटना ने पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी अधिकारियों की तरफ से इस ड्रोन लॉन्च को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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प्रधानमंत्री मंसूर बारजानी ने बताया खतरनाक escalation

प्रधानमंत्री मंसूर बारजानी ने इस कायराना हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक खतरनाक escalation यानी तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह सीधा हमला कुर्दिस्तान क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में यह भी कहा कि इस तरह की शत्रुतापूर्ण और लापरवाह हरकतों से KRG डरने वाला नहीं है और वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने जरूरी कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाता रहेगा। कुर्दिस्तान काउंटर-टर्ेररिज्म सर्विस ने भी इस पूरी घटना को गैर-जिम्मेदार और अस्वीकार्य आक्रामकता करार दिया है और इसके लिए सीधे तौर पर हमलावरों को जिम्मेदार ठहराया है।

क्षेत्रीय स्थिरता और पुराना इतिहास

यह अकेली ऐसी घटना नहीं है, बल्कि यह मध्य पूर्व में चल रहे व्यापक भू-राजनीतिक तनाव का एक हिस्सा है। ईरान, इस्रायल और अमेरिका के बीच जारी आपसी तनातनी के कारण इस साल फरवरी के बाद से कुर्दिस्तान क्षेत्र को 1,000 से अधिक बार हमलों का सामना करना पड़ा है। इस तरह के लगातार हो रहे हमलों से आम लोगों के मन में डर का माहौल बनता जा रहा है, हालांकि स्थानीय सरकार स्थिति को संभालने के लिए लगातार काम कर रही है।

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