अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म होने की कगार पर है। दोनों देशों के बीच एक बड़ा समझौता लगभग तय हो गया है, जिसका यूरोपीय संघ यानी EU की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने खुलकर स्वागत किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के बीच चल रही इस बातचीत से खाड़ी देशों में शांति की नई उम्मीद जगी है। इस समझौते का सीधा असर खाड़ी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और तेल के कारोबार पर भी देखने को मिलेगा।

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इस समझौते में क्या-क्या शर्तें रखी गई हैं?

इस समझौते को मुख्य रूप से 60 दिनों के सीजफायर एक्सटेंशन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे इस्लामाबाद डिक्लेरेशन भी कहा जा रहा है। समझौते के तहत कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना: इस समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना है ताकि ईरान बिना किसी परेशानी के अपना तेल बेच सके।
  • प्रतिबंधों में ढील: अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से नाकाबंदी हटाने और उसे तेल बेचने की अनुमति देने के लिए प्रतिबंधों में सीमित छूट देने को तैयार है।
  • मध्यस्थ की भूमिका: इस पूरे समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ के तौर पर बड़ी भूमिका निभाई है, जिसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान में अहम बैठकें की हैं।

परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या पेंच फंसा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि ईरान के साथ डील लगभग पूरी हो चुकी है और इसके अंतिम विवरणों पर बातचीत चल रही है। हालांकि, ईरान ने इस दावे पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया है कि शुरुआती समझौते में परमाणु कार्यक्रम या समृद्ध यूरेनियम को छोड़ने की कोई बात शामिल नहीं है और इस पर आगे चर्चा होगी। इसके साथ ही ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से ईरान के प्रबंधन में ही रहेगा।

खाड़ी देशों और भारतीय प्रवासियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस समझौते को लेकर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन, मिस्र और इजरायल जैसे सहयोगियों के साथ भी बातचीत की है। खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित होने से भारतीय प्रवासियों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। तेल की कीमतों में स्थिरता आने से वैश्विक बाजार में सुधार होगा और खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों के रोजगार और सुरक्षा को बल मिलेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस डील में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान इस समझौते में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान में चर्चा की है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस शांति प्रक्रिया का स्वागत किया है।

क्या ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए तैयार हो गया है?

ईरान ने साफ किया है कि शुरुआती फ्रेमवर्क समझौते में परमाणु मुद्दा शामिल नहीं है। यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दों पर बाद में बातचीत की जाएगी।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.