Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के बाद अब इसे कमर्शियल जहाजों के लिए लगभग पूरी तरह से बंद माना जा रहा है। 16 मार्च 2026 को ब्रुसेल्स में हुई बैठक में EU (European Union) के सदस्य देशों ने इस अहम रास्ते को फिर से खोलने के लिए चर्चा शुरू कर दी है। EU की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas के अनुसार, इस जलमार्ग को खुला रखना बहुत जरूरी है और इसके लिए यूरोपीय देश जल्द ही कई कड़े कदम उठाएंगे। फरवरी के अंत में शुरू हुए विवाद के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही पर गहरा असर पड़ा है।

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Strait of Hormuz बंद होने से व्यापार और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इस रास्ते के बंद होने का सीधा असर दुनिया भर के व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। वर्तमान में हालात यह हैं कि ईरान इस क्षेत्र में युद्ध के समय वाले नियम (wartime transit rules) लागू होने की बात कह रहा है। नीचे कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं जो बताते हैं कि यह मामला इतना गंभीर क्यों है:

  • दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG (Liquefied Natural Gas) इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
  • 2 मार्च 2026 के बाद से इस रास्ते से जहाजों का आना-जाना काफी कम हो गया है। अब ज्यादातर कमर्शियल जहाज Cape of Good Hope होकर लंबा रास्ता ले रहे हैं।
  • खतरे को देखते हुए इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों का इंश्योरेंस प्रीमियम (war-risk premium) काफी ज्यादा बढ़ गया है।
  • रास्ता लंबा होने और बीमा महंगा होने से सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।

रास्ते को सुरक्षित करने के लिए दुनिया भर के देशों की क्या तैयारी है?

इस संकट को देखते हुए कई देश एक साथ मिलकर काम करने का प्लान बना रहे हैं। EU अपने Operation Aspides को बड़ा करने पर विचार कर रहा है, जो मूल रूप से Red Sea में काम करता है। हालांकि, जर्मनी ने इस प्लान पर थोड़ी शंका जताई है, लेकिन अन्य देश मदद के लिए आगे आ रहे हैं। समुद्री रास्ते की सुरक्षा के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं वह इस प्रकार हैं:

  • वर्तमान में फ्रांस, ग्रीस और इटली के तीन युद्धपोत Operation Aspides के तहत काम कर रहे हैं। अब फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने दो अतिरिक्त युद्धपोत (frigates) भेजने का वादा किया है।
  • समुद्र के पानी में छिपी बारूदी सुरंगों (mines) को हटाने के लिए खास माइन्सवीपिंग ड्रोन तैनात करने का प्लान भी बनाया जा रहा है।
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कम से कम सात देशों से इस रास्ते पर अपने युद्धपोत भेजने की मांग की है।
  • अगर सभी 27 EU देशों में सहमति नहीं बनती है, तो कुछ खास देश मिलकर एक अलग गठबंधन (coalition of the willing) बनाकर इस जलमार्ग को सुरक्षित करेंगे।
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.