यूरोपीय संघ के ऊर्जा आयुक्त Dan Jorgensen ने यूरोपीय सरकारों को एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से ऊर्जा बाजारों में लंबे समय तक रुकावट आ सकती है। यह चेतावनी 31 मार्च 2026 को होने वाली एक आपातकालीन बैठक से पहले दी गई है। ब्रसेल्स को सबसे ज्यादा चिंता डीजल और जेट फ्यूल की सप्लाई को लेकर है, क्योंकि यूरोप अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा गल्फ देशों से पूरा करता है।

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ऊर्जा संकट और तेल की सप्लाई पर क्या होगा असर?

यूरोप अपनी कुल जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत से ज्यादा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद गल्फ रीजन से आयात करता है। 28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय गैस की कीमतों में 70 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है। ईरान द्वारा दुबई के पास एक तेल टैंकर पर हमला करने की घटना के बाद से बाजार में असुरक्षा का माहौल और गहरा गया है। सरकारों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे कदम न उठाएं जिससे ईंधन की खपत बढ़े या रिफाइनरी के उत्पादन में कोई कमी आए।

आने वाले दिनों के लिए क्या हैं जरूरी निर्देश?

ऊर्जा आयुक्त ने सदस्य देशों को चिट्ठी लिखकर कुछ विशेष तैयारियां करने को कहा है ताकि संकट का असर कम किया जा सके। इसके लिए नीचे दिए गए बिंदुओं पर ध्यान देने को कहा गया है:

  • रिफाइनरियों में होने वाले गैर-जरूरी मेंटेनेंस के काम को फिलहाल टाल दिया जाए।
  • ट्रांसपोर्ट सेक्टर में तेल की बचत के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।
  • पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाने से बचा जाए।
  • ईंधन की खपत बढ़ाने वाली नीतियों पर फिलहाल रोक लगाई जाए।
  • G7 देशों के वित्त मंत्री और ऊर्जा मंत्री लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए रखें।

यूरोपीय आयोग ने पहले ही 19 मार्च 2026 को तेल समन्वय समूह की बैठक बुलाई थी ताकि सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया जा सके। फिलहाल अधिकारी इस बात पर नजर रख रहे हैं कि युद्ध की वजह से सप्लाई चेन में कितनी रुकावट आ सकती है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.