EU देशों में इसराइल के साथ डील खत्म करने पर छिड़ी बहस, गाजा और वेस्ट बैंक में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर बढ़ा दबाव
यूरोपीय संघ (EU) के देशों के बीच इसराइल के साथ हुए व्यापार और राजनीतिक समझौते को रोकने या खत्म करने पर जोरदार बहस चल रही है। गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही बमबारी और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर कई देशों में भारी दबाव है। 21 अप्रैल 2026 को लक्समबर्ग में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की एक बड़ी मीटिंग हुई, जिसमें इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की गई।
इस समझौते को रोकने की मांग क्यों हो रही है?
स्पेन, आयरलैंड और स्लोवेनिया जैसे देश चाहते हैं कि इसराइल के साथ हुए समझौते को तुरंत रोका जाए। स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने कहा कि इस मामले में यूरोप की साख दांव पर लगी है। आयरलैंड और बेल्जियम ने भी मानवाधिकारों के उल्लंघन और इसराइल के नए डेथ पेनल्टी बिल का हवाला देते हुए इस कदम का समर्थन किया। वहीं, जर्मनी और इटली ने इस फैसले का विरोध किया और कहा कि इसराइल के साथ बातचीत करना ज्यादा सही तरीका होगा।
समझौता खत्म करने के लिए क्या नियम हैं?
EU और इसराइल के बीच यह समझौता साल 2000 में शुरू हुआ था, ताकि दोनों के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग बना रहे। इस समझौते के नियम कहते हैं कि अगर पूरे एग्रीमेंट को खत्म करना है, तो सभी 27 सदस्य देशों की सहमति जरूरी है। लेकिन अगर सिर्फ व्यापार वाले हिस्से को रोकना है, तो 27 में से 15 देशों की मंजूरी और 65% आबादी का समर्थन चाहिए होगा। सितंबर 2025 में भी व्यापार नियमों को रोकने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला था।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों का क्या कहना है?
संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों और पत्रकारों की कमेटी ने भी इस समझौते को रोकने की मांग की है। UN विशेषज्ञों ने कहा कि एक तरफ मानवाधिकारों की बात करना और दूसरी तरफ ऐसे देश के साथ व्यापार करना सही नहीं है जिस पर युद्ध अपराधों के आरोप लगे हों। मीटिंग के दौरान वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार और गाजा की बदतर स्थिति पर भी चिंता जताई गई। फिलहाल देशों के बीच मतभेद होने के कारण कोई आखिरी फैसला नहीं हो सका है।