यूरोपीय संघ (EU) और कुवैत अपनी 40 साल पुरानी दोस्ती को अब और मजबूत कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर देश में स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और पर्यावरण को बचाने के लिए एक नया विजन तैयार किया है। इसका मकसद कुवैत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाना है ताकि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर माहौल मिल सके।

20 जून 2026 को यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने एक बड़ी मीटिंग की। इस मीटिंग में यूरोपीय और कुवैती अधिकारियों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बड़े लोगों ने हिस्सा लिया। चर्चा इस बात पर हुई कि कैसे तकनीकी मदद से कुवैत अपनी ऊर्जा जरूरतों में विविधता ला सकता है। कुवैत ने लक्ष्य रखा है कि साल 2060 तक वह कार्बन न्यूट्रल हो जाएगा, जिसका मतलब है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों के असर को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

बिजली उत्पादन के लिए नए लक्ष्य

कुवैत सरकार ने अपनी बिजली जरूरतों के लिए कुछ बड़े और साफ लक्ष्य तय किए हैं। देश का प्लान है कि साल 2050 तक कुल बिजली का 50 प्रतिशत हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी यानी अक्षय ऊर्जा से बनाया जाए। इसके अलावा, 2030 तक इस लक्ष्य को 30 प्रतिशत तक ले जाने की तैयारी है। यह पूरी योजना कुवैत के ‘विजन 2035’ विकास रणनीति का एक अहम हिस्सा है।

इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए फरवरी 2026 में कुवैत सिटी में ‘EU-Kuwait Green Transition Forum’ का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कुवैत के बिजली, पानी और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (MEWRE) और कुवैत इंस्टीट्यूट फॉर साइंटिफिक रिसर्च (KISR) ने मुख्य भूमिका निभाई। साथ ही जुलाई 2025 में यूरोपीय संघ ने एक ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ का प्रस्ताव दिया था, ताकि दोनों पक्षों के बीच सहयोग के लिए एक पक्का और कानूनी ढांचा तैयार हो सके।

अधिकारियों और विशेषज्ञों की राय

यूरोपीय संघ की राजदूत Anne Koistinen ने कहा कि यूरोप और कुवैत के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में गहरा सहयोग है और यह बातचीत आगे बढ़ना जरूरी है। वहीं, मंत्री Dr. Sabeeh Al-Mukhaizeem ने साफ किया कि कुवैत टिकाऊ विकास और साफ ऊर्जा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। KISR के एक्टिंग डायरेक्टर जनरल Mashaan Al-Otaibi ने बताया कि इस ग्रीन ट्रांजिशन प्रोजेक्ट से देश में बिजनेस करने का माहौल और बेहतर होगा।

Markaz के CEO अली एच. खलील ने भी इस बात की पुष्टि की कि कुवैत में अब ग्रीन फाइनेंस और ऊर्जा बदलाव के प्रोजेक्ट्स के लिए काफी दिलचस्पी बढ़ी है। इसमें कई वित्तीय संस्थान और बैंक भी शामिल हो रहे हैं ताकि पर्यावरण के अनुकूल प्रोजेक्ट्स को पैसा मिल सके।