Hormuz Strait पर EU का बड़ा फैसला, कहा नेविगेशन पर कोई समझौता नहीं होगा, सैन्य ताकत बढ़ाने की तैयारी

यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं ने साइप्रस में हुई अपनी मीटिंग में साफ कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों के आने-जाने की आजादी पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने इस मुद्दे को नॉन-नेगोशिएबल बताया है। यह पूरी चर्चा मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल ट्रेड पर पड़ने वाले असर को लेकर की गई है।

EU और अन्य देशों ने सुरक्षा के लिए क्या तैयारी की है?

यूरोपीय संघ की हाई रिप्रेजेंटेटिव Kaja Kallas ने समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के लिए इस इलाके में यूरोपीय सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की मांग की है। इटली ने अपनी तरफ से युद्धपोत और माइंसवीपर तैनात करने की तैयारी कर ली है। वहीं ब्रिटेन ने भी ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की बात दोहराई है। EU अब अपने मौजूदा नेवल मिशन Aspides के दायरे को बढ़ाने पर विचार कर रहा है ताकि जहाजों की आवाजाही बनी रहे।

ईरान की हरकतों और अमेरिका के कड़े आदेश का क्या असर हुआ?

तनाव इतना बढ़ गया है कि पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से केवल 5 जहाज ही गुजर पाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेना को आदेश दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी छोटी नावों को शूट एंड किल किया जाए। ईरान ने 22 अप्रैल को तीन जहाजों पर हमला किया था। इस स्थिति को देखते हुए EU ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों (Sanctions) के कानूनी दायरे को बढ़ाने का फैसला किया है।

परमाणु समझौते और नए नियमों पर क्या विवाद है?

Kaja Kallas ने चेतावनी दी है कि अगर परमाणु विशेषज्ञों के बिना ईरान के साथ बातचीत हुई, तो नया समझौता 2015 वाले JCPOA समझौते से कमजोर हो सकता है। इसके अलावा, यूरोपीय आयोग ने ईरान के साथ मिलकर पैसे लेकर रास्ता देने यानी पे-टू-पास सिस्टम शुरू करने के विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसे गैरकानूनी बताया है।