European Union ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट Ursula von der Leyen ने कहा है कि अभी इन प्रतिबंधों को हटाना बहुत जल्दबाजी होगी। उन्होंने साफ किया कि जब तक ईरान अपने लोगों के साथ व्यवहार में बड़ा बदलाव नहीं लाता, तब तक पाबंदियां बनी रहेंगी। इस फैसले से ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने वाला है।

EU ने ईरान पर प्रतिबंध हटाने से क्यों किया इनकार?

यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट Ursula von der Leyen ने बर्लिन में बताया कि ईरान में अपनी ही जनता का दमन हो रहा है, इसलिए प्रतिबंध जरूरी हैं। उनके मुताबिक, ईरान में जब तक कोई बुनियादी बदलाव नहीं आता, तब तक पाबंदियां नहीं हटेंगी। यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट Antonio Costa ने भी इसी बात को दोहराया है कि अभी प्रतिबंधों में ढील देने की बात करना बहुत जल्दी है।

  • EU ने पहले ही कई प्रतिबंधों को 13 अप्रैल 2027 तक बढ़ा दिया है।
  • इन प्रतिबंधों में यात्रा पर रोक और संपत्तियों को फ्रीज करना शामिल है।
  • उन उपकरणों के निर्यात पर भी रोक है जिनका इस्तेमाल लोगों की निगरानी या दमन के लिए किया जा सकता है।

अमेरिका की कार्रवाई और ईरान की नई कोशिशें क्या हैं?

अमेरिका के ट्रेजरी विभाग (OFAC) ने भी ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने ईरान, तुर्की और UAE के 14 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं जो हथियार और ड्रोन के नेटवर्क में शामिल थे। साथ ही चीन की कुछ बड़ी रिफाइनरियों पर भी पाबंदी लगाई गई है जो ईरान के तेल व्यापार में मदद कर रही थीं।

दूसरी तरफ, ईरान इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के लिए सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान और ओमान के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा गया है, जिसका मकसद Strait of Hormuz को फिर से खोलना और संघर्ष को खत्म करना है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.