यूरोपीय संघ (EU) और यूनाइटेड किंगडम ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बड़ी पहल शुरू की है। 2 अप्रैल 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया के 40 से अधिक देशों ने इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कूटनीतिक और सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। इस कदम का मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र से होने वाले व्यापार और तेल की सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है, जिसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी और ईंधन की कीमतों पर पड़ता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए क्या है नया प्लान?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने मिलकर एक साझा योजना पर काम शुरू किया है। इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाकर नौवहन की स्वतंत्रता बहाल की जाएगी। यूरोपीय संघ की प्रतिनिधि काजा कल्लास ने साफ किया है कि हॉर्मुज की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए EU अपने पुराने नौसैनिक अभियानों (ASPIDES और ATALANTA) की ताकत बढ़ाने या ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव जैसा कोई नया सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर विचार कर रहा है।

40 देशों की बैठक में लिए गए मुख्य फैसले और महत्वपूर्ण जानकारी

ब्रिटिश विदेश सचिव यवेट कूपर द्वारा आयोजित इस वर्चुअल बैठक में भारत, यूएई, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और जापान जैसे कई प्रमुख देश शामिल हुए। बैठक में उन जहाजों और नाविकों की रिहाई पर जोर दिया गया जो वर्तमान में वहां फंसे हुए हैं। इसके साथ ही ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाने और भविष्य में कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की संभावना पर भी बातचीत हुई।

प्रमुख बिंदु विवरण
बैठक की तारीख 2 अप्रैल 2026
शामिल देश भारत, यूएई, ब्रिटेन, EU के सदस्य समेत 40+ देश
अगला कदम अगले हफ्ते सैन्य योजनाकार समुद्री सुरंगों (mines) को हटाने की रणनीति बनाएंगे
अमेरिका का रुख राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बैठक से दूरी बनाई और सहयोगियों को खुद सुरक्षा करने को कहा
मुख्य लक्ष्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को रोकना

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह समुद्री रास्ता जल्द नहीं खुलता है, तो इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और कारोबारियों के लिए भी यह रास्ता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी रूट से ज्यादातर व्यापारिक सामान आता-जाता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ मिलकर कोशिश की जा रही है कि व्यापारिक जहाजों को बिना किसी टोल या रोक-टोक के गुजरने की अनुमति मिले।