अगर आप आने वाले समय में यूरोप जाने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। मिडिल ईस्ट से जेट फ्यूल की सप्लाई पूरी तरह बंद होने से वहां हवाई जहाजों के ईंधन की भारी किल्लत होने वाली है। यह समस्या ऐसे समय आई है जब पूरी दुनिया में लोग गर्मियों की छुट्टियों के लिए यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।

यूरोप में जेट फ्यूल की कमी क्यों हो रही है?

WAM (Emirates News Agency) की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और समुद्री रास्तों के बंद होने की वजह से ईंधन की सप्लाई रुक गई है। अप्रैल 2026 में मिडिल ईस्ट से आने वाला जेट फ्यूल पूरी तरह खत्म हो गया है। रिकॉर्ड के हिसाब से ऐसा 2017 के बाद पहली बार हुआ है। इस वजह से यूरोप के हवाई अड्डों पर ईंधन का संकट गहरा सकता है।

ईंधन की कितनी कमी है और इसका क्या असर होगा?

यूरोप के OECD देशों में ईंधन की जरूरत और उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:

  • कुल खपत: यूरोप के OECD देश हर दिन करीब 16 लाख बैरल जेट फ्यूल और केरोसिन का इस्तेमाल करते हैं।
  • कुल उत्पादन: वहां की रिफाइनरी हर दिन केवल 11 लाख बैरल ईंधन ही बना पाती हैं।
  • कुल कमी: हर दिन करीब 5 लाख बैरल ईंधन की कमी रहती है जिसे बाहर से मंगवाना पड़ता था।

अब जब मिडिल ईस्ट से सप्लाई बंद हो गई है, तो इस 5 लाख बैरल की कमी को पूरा करना मुश्किल होगा, जिससे फ्लाइट्स के संचालन पर असर पड़ सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यूरोप में जेट फ्यूल की किल्लत क्यों हुई?

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और मुख्य शिपिंग रूट बंद होने के कारण वहां से होने वाली सप्लाई पूरी तरह रुक गई है।

ईंधन की कितनी कमी का सामना कर रहा है यूरोप?

यूरोप के OECD देशों को रोजाना 16 लाख बैरल ईंधन चाहिए होता है, लेकिन उत्पादन सिर्फ 11 लाख बैरल है, जिससे 5 लाख बैरल की कमी बनी हुई है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.