यूरोप अब Strait of Hormuz को सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इस मिशन की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें अमेरिका की सीधी भूमिका नहीं होगी। ब्रिटेन और फ्रांस इस पूरी तैयारी की अगुवाई कर रहे हैं ताकि समुद्री रास्ते से होने वाले व्यापार और शिपिंग को फिर से सुचारु किया जा सके।
यूरोपीय देशों का क्या है प्लान और कब होगी बैठक
खबरों के मुताबिक, 17 अप्रैल 2026 को यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टारर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन दर्जनों देशों के साथ एक ऑनलाइन बैठक करेंगे। इस मीटिंग में स्ट्रेट की निगरानी पर चर्चा होगी, लेकिन अमेरिका इस चर्चा का हिस्सा नहीं होगा। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने बताया कि यह मिशन तभी शुरू किया जाएगा जब क्षेत्र में शांति बहाल होगी और शत्रुता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
इस मिशन के मुख्य उद्देश्य और जरूरी काम
इस योजना का मुख्य लक्ष्य शिपिंग कंपनियों के बीच भरोसा जगाना है ताकि वे युद्ध खत्म होने के बाद इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकें। इस मिशन के तहत तीन मुख्य काम किए जाएंगे:
- जहाजों की निकासी: जो सैकड़ों जहाज वहां फंसे हुए हैं, उन्हें बाहर निकालने के लिए रसद और इंतजाम करना।
- माइन क्लियरिंग: समुद्र में बिछी माइन्स (खदानों) को हटाना, क्योंकि यूरोप के पास इस काम के लिए बेहतर क्षमताएं हैं।
- सुरक्षा और निगरानी: सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए नौसैनिक एस्कॉर्ट्स, फ्रिगेट और विध्वंसक जहाज तैनात करना।
कौन से देश होंगे शामिल और किन्हें रखा गया बाहर
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा है कि यह मिशन केवल रक्षात्मक होगा। इसमें उन देशों को शामिल नहीं किया जाएगा जो युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हैं। इस योजना से जुड़े देशों का विवरण नीचे दिया गया है:
| श्रेणी | देश/संस्था |
|---|---|
| नेतृत्व करने वाले देश | यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस |
| संभावित भागीदार | जर्मनी, चीन और भारत |
| बाहर रखे गए पक्ष | अमेरिका, इज़राइल और ईरान |
| क्षेत्रीय समन्वय | ईरान और ओमान |
