दुनिया की नजरें अब Strait of Hormuz पर टिकी हैं। फ्रांस की डिफेंस मिनिस्टर Catherine Vautrin ने ऐलान किया है कि यूरोपीय देश यहां समुद्र से माइन्स हटाने और जहाजों को रास्ता दिलाने का काम करेंगे। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इस समुद्री रास्ते से दुनिया का बहुत सारा तेल और गैस गुजरता है और फिलहाल वहां सुरक्षा को लेकर हालात खराब हैं।

क्या है यूरोपीय देशों का नया प्लान?

फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड्स जैसे देशों के पास समुद्र से माइन्स हटाने की क्षमता है। डिफेंस मिनिस्टर ने साफ किया कि ये टीमें केवल जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए एस्कॉर्ट सर्विस देंगी। यह कोई हमला करने वाला मिशन नहीं होगा, बल्कि इसका मकसद केवल व्यापार वाले जहाजों की सुरक्षा करना है।

पेरिस में बड़ी मीटिंग और 40 देशों की भागीदारी

आज 17 अप्रैल 2026 को पेरिस में एक बड़ी मीटिंग हो रही है। इस मीटिंग की अध्यक्षता फ्रांस और ब्रिटेन मिलकर कर रहे हैं। इसमें दुनिया के करीब 40 देश हिस्सा ले रहे हैं ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। इस कदम से अमेरिका को यह संकेत दिया जाएगा कि यूरोप भी समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने के लिए अपनी भूमिका निभाने को तैयार है।

आम व्यापार और सप्लाई पर क्या होगा असर?

Strait of Hormuz में तनाव की वजह से तेल ले जाने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम हो गई है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां जहाजों की आवाजाही सामान्य से 10% से भी कम रह गई है। अगर यूरोपीय देश यहां सुरक्षा बढ़ाते हैं और रास्ता साफ होता है, तो तेल की सप्लाई फिर से सामान्य हो सकती है।

विवरण जानकारी
घोषणा की तारीख 17 अप्रैल 2026
मुख्य अधिकारी Catherine Vautrin (डिफेंस मिनिस्टर, फ्रांस)
प्रमुख सहयोगी देश फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन
मीटिंग का स्थान पेरिस
कुल शामिल देश करीब 40
मुख्य उद्देश्य जहाजों की सुरक्षा और माइन्स हटाना
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.